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गिरगांव तक पहुंचा सफेद पट्टियों का विवाद

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मुंबई, 14 जून (हि.स.)। मुंबई में शुरू हुआ सड़कों पर सफेद पट्टी का विवाद घाटकोपर और दादर के बाद अब गिरगांव चौपाटी के फुटपाथों तक जा पहुंचा है। इसे सांस्कृतिक आतंकवाद का नाम देते हुए राज ठाकरे की अगुवाई वाली मनसे सड़कों पर उतर गई है। यह विवाद मराठी भाषी और जैन समुदाय के बीच उठता नजर आ रहा है।

मुंबई में सफेद पट्टी का विवाद बढ़ता जा रहा है। इससे पहले मनसे नेता संदीप देशपांडे ने दादर में सफेद पट्टियों के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाया था। शिवसेना नेता व मुंबई मनपा में नेता प्रतिपक्ष किशोरी पेडणेकर भी सड़क पर उतर गईं। इसके बाद मनपा कर्मचारियों ने दादर में सफेद पट्टी को काला कर दिया। अब गिरगांव में सफेद पट्टियों का विवाद उठा है। मनसे कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और सफेद पट्टी को खुद ही काला करना शुरू कर दिया। मामला पुलिस के बीच-बचाव तक जा पहुंचा। मनसे विभाग प्रमुख दिनेश पुंडे के अनुसार मनसे और गिरगांवकर संगठन के कार्यकर्ताओं को गावदेवी पुलिस ने हिरासत में ले लिया। जैन धर्मावलंबियों द्वारा बनाई गई सफेद पट्टियों को लेकर हम गिरगांवकर सड़क पर उतरे हैं। इस सांस्कृतिक आतंकवाद को मंत्री मंगलप्रभात लोढ़ा की शह मिल रही है।

पिछले सप्ताह विद्याविहार इलाके की एक सोसायटी में एक जैन परिवार ने जैन मुनियों के आने पर सोसायटी इलाके में सफेद पट्टियां बनाई थीं। सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर प्रसाद वेदपाठक ने सोशल मीडिया पर इसको लेकर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की थी। इससे विवाद खड़ा हो गया था। इसके बीद बीते शुक्रवार को दादर में भी ऐसी ही सफ़ेद धारियां देखी गईं। दादर में गोखले रोड पर एक जैन पूजा स्थल के पास रोड पर ऐसी सफ़ेद धारियां बनाए जाने के बाद, मनसे ने आक्रामक रुख अपनाया था। ठाकरे सेना और मनसे कार्यकर्ताओं के विरोध के बाद मनपा प्रशासन ने इन पट्टियों को काले पेंट से ढक दिया। इस मामले के बाद रविवार को भी चर्नीरोड-गिरगांव इलाके में नया विवाद खड़ा हुआ।

दरअसल जब जैन साधु-साध्वियां अनुयायियों के घर जाते हैं, तो उनके रास्ते में ऐसी सफेद धारियां बनाई जाती हैं। गर्मियों में ज़मीन बहुत गर्म हो जाती है, इसलिए नंगे पैर चलने वाले साधु-साध्वियों के पैरों को ऐसी धारियों की वजह से गर्मी महसूस नहीं होती। बताया जाता है कि ये धारियां इसलिए बनाई भी जाती हैं ताकि जीवन के प्रति दया सिखाने वाले जैन धर्म के साधुओं के चलते समय उनके पैरों के नीचे दबकर कोई जीव-जंतु न मरें। जैन साधु-साध्वियां धर्म के अनुयायियों के लिए अपने रास्ते पर सफेद धारियां बनाने की शर्त रखते हैं।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार