विधान परिषद चुनाव के बाद महायुति में टकराव
मुंबई, 28 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र विधान परिषद की पांच सीटों के चुनाव में मिली दो सीटों पर जीत को लेकर सत्तारूढ़ महायुति के घटक दलों में टकराव शुरू हो गया है। चुनावी नतीजों के बाद महायुति में अंदरूनी मतभेद सामने आए हैं। जहां भाजपा ने चुनाव में हार के कारण सहयोगी दलों की भूमिका पर सवाल उठाए हैं, तो वहीं शिवसेना शिंदे गुट ने भी भाजपा पर पलटवार किया है.
महायुति में नेतृत्व का मुद्दा भी चर्चा में आ गया है। शिंदे गुट के विधायक रवींद्र धंगेकर ने उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को फिर से मुख्यमंत्री बनाने की पैरवी की है। धंगेकर ने कहा कि टीचर्स और ग्रेजुएट ने सरकार के खिलाफ वोट किया और सरकार के काम से अपनी नाराजगी जताई है। इस बात पर गंभीरता से विचार करने की जरूरत है कि शिक्षकों और सरकार के बीच करीबी रिश्ते होने के बावजूद शिक्षकों ने सरकार के खिलाफ वोट क्यों किया। भाजपा एकनाथ शिंदे की वजह से सत्ता में आई, शिंदे को फिर से नेतृत्व करने का मौका दिया जाए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि शिवसेना के खुले समर्थन के बावजूद तालमेल में कहां कमी थी।
इधर भाजपा ने आरोप लगाया है कि शिवसेना शिंदे गुट के पुणे में दूसरे उम्मीदवार को समर्थन देने और छत्रपति संभाजीनगर में एनसीपी के खिलाफ कैंपेन से गठबंधन के चुनावी गणित पर असर पड़ा। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष केशव उपाध्ये ने महायुति के नेताओं को आत्मंथन की सलाह दी है. पार्टी प्रदेश प्रवक्ता नवनाथ बन ने हार के लिए शिंदे गुट को जिम्मेदार ठहराया है. उन्होंने कहा कि चुनाव में शिंदे गुट का बेहतर साथ नहीं मिला.
शिंदे गुट की विधायक मनीषा कायंदे ने इन आरोपों का जवाब देते हुए दावा किया है कि नागपुर ग्रेजुएट सीट पर हार की वजह भाजपा की अंदरूनी कलह थी। पूर्व विधायक अनिल सोले ने अपना नामांकन भरने के बाद आखिरी मिनट में नाम वापस ले लिया था। कराले मास्टर के पास भी एक आवेदन था। उन्होंने कहा कि हार के लिए सहयोगियों को दोष देना गठबंधन की विचारधारा के लिए ठीक नहीं है। पुणे में फ्रेंडली फाइट पहले ही तय हो चुकी थी। सहयोगी पार्टियों पर हमला करना सही नहीं है।
शिंदे गुट के नेता संजय निरुपम ने भी भाजपा के आरोपों पर एतराज जताया है। उन्होंने कहा कि नागपुर चुनाव के इंचार्ज होने के बावजूद उनसे कोई बातचीत नहीं हुई। भाजपा और शिंदे गुट के बीच तालमेल की कमी पर साथ बैठकर बातचीत करने की ज़रूरत है। तीनों पार्टियां साथ रहेंगी, तभी महायुति की ताकत बनी रहेगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

