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व्यायसायिक बिजली बिल से शालाओं पर बोझा- विधायक केलकर

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मुंबई,08 जुलाई ( हि.स.) । राज्य में महावितरण प्राइमरी स्कूलों से व्यावसायिक दरों पर बिजली बिल ले रहा है और ये स्कूल प्रशासन के लिए बोझ बन रहे हैं। विद्यार्थियों को ज़रूरी और आधुनिक तकनीक सुविधाएं देने के लिए इन बिजली बिलों का भुगतान घरेलू दरों पर करने का सुझाव देते हुए, संजय केलकर ने एजुकेशनल प्रॉब्लम पर बात की।

विधायक संजय केलकर ने सेशन में विद्यार्थियों, शाला प्रबंधन, शिक्षक और अभिभावकों के सामने आने वाले अलग-अलग इश्यू पर चर्चा की और कुछ सुझाव दिए। इस बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि राज्य में क्लास 12 के 1.5 मिलियन स्टूडेंट्स, 23 हज़ार सेकेंडरी स्कूल और 11 हज़ार जूनियर कॉलेज हैं। खासकर, क्लास 1 से 5 तक लगभग 1.5 करोड़ विद्यार्थी पढ़ते हैं। इसलिए, उन्होंने ने राज्य में शिक्षा की नींव मज़बूत करने के लिए अलग-अलग नीतियां लागू करने की ज़रूरत बताई।

प्राथमिक स्कूल उन्हें मिलने वाली ग्रांट पर चलते हैं। इन स्कूलों में विद्यार्थियों को अलग-अलग शैक्षणिक सुविधाएं दी जाती हैं। लेकिन, महावितरण जो बिजली बिल लेता है, वह बाजारी रेट पर है, इसलिए सब्सिडी से यह खर्च पूरा करना नामुमकिन है। ऐसे में, अगर बिजली का बिल नहीं भरा जाता है, तो बिजली काट दी जाती है, जिससे विद्यार्थियों की सुविधाएं बंद हो जाती हैं और वे आधुनिक तकनीक से दूर हो जाते हैं। इसलिए, विधायक केलकर ने मांग की कि महावितरण इन स्कूलों को घरेलू दरों पर बिजली का बिल दे।

फिलहाल, टीचर्स ऑर्गनाइज़ेशन्स ने TET एग्जाम को लेकर अग्रेसिव रुख अपनाया है। हालांकि टीचर्स को इस एग्जाम से कोई एतराज़ नहीं है, लेकिन ऑर्गनाइज़ेशन्स को इसे लागू करने के तरीके पर एतराज़ है। इसलिए, मिस्टर केलकर ने डर जताया कि आने वाले समय में आंदोलन की वजह से करीब 80 परसेंट स्कूल खाली हो जाएंगे। कोर्ट के दिए फैसले के मुताबिक, टीचर्स को अगस्त 2028 तक यह एग्जाम देने की इजाज़त दी जानी चाहिए। मिस्टर केलकर ने सुझाव दिया कि सीनियर टीचर्स को एग्जाम न देने की वजह से प्रमोशन से दूर नहीं किया जाना चाहिए।

दिल्ली बोर्ड के स्कूलों में मनमाना मैनेजमेंट चल रहा है और पेरेंट्स को यूनिफॉर्म और स्कूल का सामान मोनोपॉली तरीके से खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। एजुकेशन ऑफिसर जो नोटिस भेज रहे हैं, उन्हें भी केले की टोकरी दिखाई जा रही है। इसलिए, आम स्टूडेंट्स और पेरेंट्स को इंसाफ दिलाने के लिए, राज्य सरकार को दखल देकर इन स्कूलों को कंट्रोल करने की ज़रूरत है, ऐसा श्री केलकर ने कहा। SIR स्कीम के लिए टीचर्स को BLOs के तौर पर अपॉइंट किया गया है। चूंकि यह स्कीम एक नेशनल काम है, इसलिए टीचर्स की नियुक्ति पर कोई एतराज़ नहीं है, लेकिन इन नियुक्तियों के दौरान कई स्कूल खाली हो गए हैं। उन्होंने इस बात पर भी ध्यान देने की ज़रूरत बताई कि स्टूडेंट्स को परेशानी न हो। श्री केलकर ने कुछ शर्तों पर टीचर्स के हेडक्वार्टर में रहने की शर्त में भी ढील देने की ज़रूरत बताई।

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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा