ठाणे शहर पोस्टर -बेनर्स से पटा, मनपा प्रशासन बेवस
मुंबई, 06 सितंबर (हि. स.) I ठाणे शहर की सुंदरता के लिए करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी, बिना इजाज़त बैनर लगाने से शहर की सूरत बिगड़ने का सिलसिला थम नहीं रहा है। एक बैनर गिरने से हुए हादसे के बाद, नागरिकों की सुरक्षा का मुद्दा गंभीर हो गया था। उसके बाद, ठाणे नगर निगम ने बड़ा हंगामा किया और बिना इजाज़त बैनरों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की। हालांकि, यह कार्रवाई अब फिर से कागजों पर ही रह गई लगती है।
शनिवार को दही हांडी उत्सव के मौके पर, कार्यकर्ताओं द्वारा लगाए गए बड़े-बड़े बैनर, ग्रीटिंग बोर्ड और राजनीतिक नेताओं के विज्ञापन ठाणे शहर के अलग-अलग हिस्सों में दिखाई दिए। शहर की मुख्य सड़कों से लेकर चौराहों तक बैनर लगे हुए थे, लेकिन नगर निगम की मशीनरी ने आराम से चुप्पी साधे रखी।
क्या कुछ दिन पहले एक दोपहिया वाहन पर बैनर गिरने के बाद भी प्रशासन ने सबक नहीं सीखा? नागरिक यह सवाल उठा रहे हैं। आरोप है कि दुर्घटना होने के बाद ही कार्रवाई की जाती है और फिर मामला शांत होते ही आंखें मूंद ली जाती हैं।
शहर की सुंदरता पर करोड़ों खर्च करना और दूसरी तरफ उसी शहर की सुंदरता को बिगाड़ने के प्रति नगर निगम की अनदेखी, यह विरोधाभास ठाणेकरों के लिए गुस्से का विषय बनता जा रहा है। अगर नियम सबके लिए एक जैसे हैं, तो क्या नगर निगम प्रशासन नेताओं के बैनरों पर कार्रवाई करने की हिम्मत करेगा?
बैनर हटाने के आदेश पर हंगामा करने का क्या फायदा, अगर अगले ही दिन वही बैनर फिर से पूरे शहर में लग जाएंगे? इसलिए, अब ठाणेकरों के बीच बस एक ही चर्चा है: 'नेता बोलेंगे, नगर निगम प्रशासन हिल जाएगा!'
डॉ प्रशांत सिनकर- यह कैसा विकास है कि सुंदरता पर करोड़ों खर्च किए जाएं और बैनर लगाने से शहर की सुंदरता बिगड़ती रहे, तब आंखें मूंद ली जाएं? क्या नगर निगम की कार्रवाई नेताओं के बैनरों पर ही रुक जाती है?
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

