आर्थिक संकट से जूझ रहे महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल को बचाने की उठी मांग
मुंबई, 06 जून (हि.स.)। महाराष्ट्र राज्य मार्ग परिवहन महामंडल (एमएसआरटीसी) गंभीर आर्थिक संकट से जझ रहा है। एसटी पर 7,000 करोड़ रुपये से अधिक की वैधानिक देनदारियां बकाया हैं। महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस ने मांग की है कि एसटी को इस संकट से बाहर निकालने के लिए परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक को पहल करनी चाहिए।
एसटी के 78वें स्थापना दिवस पर महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार को महामंडल के अध्यक्ष व परिवहन मंत्री प्रताप सरनाइक से मुलाकात की। इस दौरान उन्हें ‘लालपरी’ की प्रतिकृति भेंट कर एसटी को फिर से सशक्त बनाने के लिए किए जा रहे उनके प्रयासों की सराहना की गई।
महाराष्ट्र एसटी कर्मचारी कांग्रेस के महासचिव श्रीरंग बरगे ने बताया कि एसटी प्रबंधन की ओर से सरकार को लगातार पत्र लिखकर आर्थिक सहायता की मांग की जा रही है। मई महीने के वेतन और अन्य लंबित देयकों के लिए इस महीने 771.16 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, लेकिन सरकार ने केवल अप्रैल महीने की रियायती यात्रा प्रतिपूर्ति राशि के रूप में 363.16 करोड़ रुपए ही जारी किए हैं।
बरगे ने कहा कि सरकार द्वारा मांगी गई पूरी राशि जारी नहीं किए जाने के कारण भविष्य निधि, ग्रेच्युटी, बैंक कर्ज कटौती सहित कर्मचारियों को पूरा वेतन देना संभव नहीं हो पाएगा। इससे बकाया देनदारियों का बोझ और बढ़ेगा। इसलिए एसटी महामंडल द्वारा मांगी गई 771.16 करोड़ रुपए की पूरी राशि राज्य सरकार को तत्काल उपलब्ध करानी चाहिए। श्रीरंग बरगे के अनुसार एसटी कर्मचारियों का वेतन इसी प्रतिपूर्ति राशि से दिया जाता है। कर्मचारियों के वेतन पर हर महीने लगभग 476 करोड़ रुपए खर्च होते हैं। यदि वेतनवृद्धि के बकाया अंतर की 58 करोड़ 30 लाख रुपए की मासिक किश्त को भी शामिल किया जाए, तो कुल वेतन व्यय 534 करोड़ रुपए तक पहुंच जाता है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

