बॉम्बे हाई कोर्ट ने मांगा पीओपी पर जवाब, साबित करो हानिकारक नहीं
मुंबई, 05 अगस्त (हि.स.)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने 'प्लास्टर ऑफ पेरिस' (पीओपी) के उपयोग पर संबिधितों से जवाब मांगा है। कोर्ट ने पीओरपी का समर्थन करने वाली अखिल सार्वजनिक गणेशोत्सव समिति को निर्देश दिया है कि वह वैज्ञानिक आधार पर यह साबित करे कि पीओपी पर्यावरण के लिए उपयुक्त है और इससे प्राकृतिक जल स्रोतों को कोई हानि नहीं होगी।
कोर्ट ने साफ किया है कि वह केवल पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर विचार कर रहा है और इस रुख से किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का कोई इरादा नहीं है। न्यायमूर्ति अजय गडकरी और न्यायमूर्ति कमल खाता की खंडपीठ ने सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मूर्तिकारों को पीओपी की मूर्तियां बनाने या उनकी बिक्री करने से नहीं रोका गया है। हालांकि, ऐसी मूर्तियों का प्राकृतिक जलाशयों में विसर्जन नहीं किया जाना चाहिए। अदालत ने कहा कि उसका मकसद सिर्फ प्राकृतिक जल स्रोतों की सुरक्षा तक सीमित है।
गणेश मंडलों की ओर से अधिवक्ता उदय वरुंजीकर ने दलील दी कि पीओपी को पर्यावरण के लिए हानिकारक साबित करने वाला कोई निर्णायक वैज्ञानिक अध्ययन उपलब्ध नहीं है। साल 2008 से 2021 के बीच विभिन्न कोर्ट के निर्णयों और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) की वर्ष 2020 की गाइडलाइन में पीओपी को प्रदूषणकारी बताया गया है, लेकिन ये दिशा-निर्देश भी किसी ठोस वैज्ञानिक अध्ययन पर आधारित नहीं हैं। मूर्ति विसर्जन हिंदू धर्म की एक महत्वपूर्ण धार्मिक परंपरा है। इस पर कोर्ट ने कहा कि वह धार्मिक परंपराओं में हस्तक्षेप नहीं कर रहा है, बल्कि इस मामले पर केवल पर्यावरण संरक्षण के दृष्टिकोण से विचार किया जा रहा है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

