कैंसर शोध हेतू बायोप्सी प्रशिक्षण जरूरी - डॉ पवार सिविल सर्जन
मुंबई, 31मार्च ( हि . स.) । कैंसर जैसी जानलेवा बीमारियों का समय पर और सही डायग्नोसिस पब्लिक हेल्थ सिस्टम का सबसे बड़ा टेस्ट है, और इस प्रोसेस में बायोप्सी बहुत ज़रूरी है। डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. कैलाश पवार ने कहा कि डायग्नोसिस में देरी से बचने और समय पर इलाज शुरू करने के लिए डॉक्टरों को साइंटिफिक और प्रैक्टिकल ट्रेनिंग लेना ज़रूरी है।
ठाणे के सिविल हॉस्पिटल में बायोप्सी पर एक स्पेशल ‘हैंड्स-ऑन’ ट्रेनिंग सेशन जोश के साथ ऑर्गनाइज़ किया गया, जिसका मकसद कैंसर डायग्नोसिस प्रोसेस को और बेहतर बनाना था। पब्लिक हेल्थ डिपार्टमेंट की पहल पर और डॉ. कैलाश पवार के गाइडेंस में ऑर्गनाइज़ इस इनिशिएटिव को अच्छा रिस्पॉन्स मिला।
इस ट्रेनिंग के चीफ गाइड के तौर पर जाने-माने कैंसर सर्जन डॉ. हितेश सिंघवी ने मौजूद डॉक्टरों को डिटेल में और प्रैक्टिकल गाइडेंस दी। उन्होंने समझाया कि बायोप्सी करते समय सैंपल सही जगह से लेना, इंफेक्शन से बचने के लिए हाइजीन बनाए रखना और सैंपल को ठीक से स्टोर करना बहुत ज़रूरी है। उन्होंने डॉक्टरों को मरीज़ों के लक्षणों पर पूरा ध्यान देने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया, ताकि कैंसर की शुरुआती स्टेज में पहचान हो सके। उन्होंने यह भी कहा कि सही ट्रेनिंग और लगातार प्रैक्टिस से डायग्नोसिस में गलतियाँ कम हो सकती हैं और मरीज़ों को समय पर इलाज मिल सकता है। प्रोग्राम में एडिशनल डिस्ट्रिक्ट सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े, रेजिडेंट मेडिकल ऑफिसर डॉ. मृणाली राहुद, डेंटल सर्जन डॉ. अर्चना पवार और दूसरे जाने-माने लोग शामिल हुए।
इस सेशन में जिले के ग्रामीण अस्पतालों, up-- जिला अस्पतालों और प्राइमरी हेल्थ सेंटरों से बड़ी संख्या में डेंटल सर्जन और मेडिकल ऑफिसर शामिल हुए। हिस्सा लेने वाले डॉक्टरों को मरीज़ को संभालने, बायोप्सी सैंपल को सुरक्षित तरीके से इकट्ठा करने और शुरुआती स्टेज में कैंसर का पता लगाने की तकनीकों के बारे में डिटेल में गाइडेंस दी गई।इस दौरान प्रसिद्ध दंत विशेषज्ञ डॉ अर्चना पवार ने लाइव डेमोंस्ट्रेशन देकर कार्यक्रम को और भी प्रभावकारी बना दिया।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

