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मराठी नहीं बोलने वाले रिक्शा-टैक्सी चालकों के बैज 20 अगस्त से होंगे निलंबित

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-नए बैज के लिए मराठी की व्यावहारिक जानकारी जरूरी, फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्रों की भी होगी जांच : परिवहन मंत्री

मुंबई, 19 अगस्त (हि.स.)। महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने बुधवार को कहा कि व्यावहारिक मराठी बोलने में सक्षम नहीं होने वाले रिक्शा और टैक्सी चालकों के बैज 20 अगस्त से निलंबित किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी अनिवार्य करने वाले प्रावधान को अब सख्ती से लागू किया जाएगा।

सरनाईक ने पत्रकारों को बताया कि कोंकण मराठी साहित्य परिषद और मुंबई मराठी साहित्य संघ की ओर से पिछले 105 दिनों से राज्य में रिक्शा और टैक्सी चालकों के लिए ‘हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे मराठी भाषा अभियान’ चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत करीब 1 लाख 65 हजार 600 अमराठी रिक्शा और टैक्सी चालकों ने मराठी भाषा का प्रशिक्षण लिया है।

परिवहन मंत्री ने कहा कि राज्य में वर्ष 1989 से लागू नियमों के तहत रिक्शा और टैक्सी चलाने के लिए मराठी भाषा की व्यावहारिक जानकारी आवश्यक है। अब 12 अगस्त 2026 को बनाए गए कानूनी नियमों के आधार पर इस प्रावधान को प्रभावी ढंग से लागू किया जाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि जो चालक मराठी सीखने या बोलने में सक्षम नहीं होंगे, उनके खिलाफ कानून के तहत कार्रवाई की जाएगी और नियमों के अनुपालन के लिए अब अतिरिक्त समय नहीं दिया जाएगा।

मंत्री ने कहा कि महाराष्ट्र देश के विभिन्न हिस्सों से आने वाले लोगों को रोजगार के अवसर देता रहा है और मुंबई ने हमेशा सभी को स्थान दिया है। हालांकि, महाराष्ट्र की भाषा और संस्कृति के प्रति सम्मान और गौरव बनाए रखना भी जरूरी है। मराठी को शास्त्रीय भाषा का दर्जा मिलने के बाद इसके प्रचार, प्रसार और संरक्षण के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

सरनाईक ने बताया कि राज्य में अब तक करीब 9 लाख 65 हजार रिक्शा और टैक्सी लाइसेंस तथा बैज जारी किए जा चुके हैं। अब नए लाइसेंस और बैज जारी करते समय आरटीओ अधिकारी चालक से सीधे मराठी में बातचीत कर उसकी व्यावहारिक भाषा संबंधी जानकारी की जांच करेंगे। इस प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी। मराठी की पर्याप्त व्यावहारिक जानकारी साबित होने के बाद ही बैज जारी किया जाएगा।

परिवहन मंत्री ने बताया कि सरकार को शिकायतें मिली हैं कि रिक्शा-टैक्सी लाइसेंस और बैज हासिल करने के लिए फर्जी डोमिसाइल प्रमाणपत्रों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इसके बाद आरटीओ अधिकारियों को ऐसे प्रमाणपत्रों की गहन जांच करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों से भौतिक सत्यापन और पुलिस जांच के बाद ही आगे की कार्रवाई करने को कहा गया है।

उन्होंने कहा कि जांच का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि संबंधित आवेदक वास्तव में पिछले 15 वर्षों से महाराष्ट्र में रह रहा है या नहीं। नियमों के उल्लंघन और फर्जी दस्तावेजों के इस्तेमाल की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

सरनाईक ने बताया कि पूरे अभियान की जिम्मेदारी अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ को सौंपी गई है। उन्हें अभियान की विस्तृत रिपोर्ट अगले महीने के अंत तक सरकार को सौंपने का निर्देश दिया गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य किसी को रोजगार से वंचित करना नहीं, बल्कि राज्य में लागू नियमों का पालन सुनिश्चित करना और महाराष्ट्र की भाषा एवं संस्कृति के प्रति सम्मान बनाए रखना है।

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हिन्दुस्थान समाचार / राजबहादुर यादव