नई समुद्री विज्ञापन नीति का आवाज फाउंडेशन ने किया विरोध
मुंबई, 10 मई (हि.स.)। महाराष्ट्र समुद्री बोर्ड की नई तटीय विज्ञापन नीति का आवाज फाउंडेशन ने विरोध किया है। फाउंडेशन ने समुद्री तटों पर डिजिटल, एलईडी और चमकदार होर्डिंग्स लगाने की अनुमति का कड़ा विरोध करते हुए इसे नई पर्यावरणीय आपदा करार दिया है। संस्था का दावा है कि प्रकाश प्रदूषण से न केवल मानव स्वास्थ्य, नींद और सड़क सुरक्षा प्रभावित होगी, बल्कि समुद्री जीव और प्रवासी पक्षियों पर भी असर पड़ेगा।
फाउंडेशन ने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से व्यक्तिगत हस्तक्षेप कर अधिसूचना वापस लेने और तटीय इलाकों को विज्ञापन मुक्त रखने की मांग की है। फाउंडेशन की संस्थापिका सुमैरा अब्दुलअली ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर 'महाराष्ट्र मेरीटाइम बोर्ड (विज्ञापनों के प्रदर्शन का विनियमन) विनियम 2026' पर चिंता व्यक्त की। उनका तर्क है कि महाराष्ट्र के समुद्री तट, मैंग्रोव वन और सफेद रेत वाले किनारे ताडोबा जैसे राष्ट्रीय उद्यानों की तरह ही एक अनमोल प्राकृतिक धरोहर हैं। मैंग्रोव क्षेत्र प्रवासी पक्षियों और विभिन्न समुद्री जीवों का निवास स्थान हैं। यदि समुद्री तटों पर हवाई, तैरते हुए और चमकदार डिजिटल विज्ञापनों की अनुमति दी जाती है, तो इससे न केवल इन क्षेत्रों की सुंदरता नष्ट होगी, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र को भी अपूरणीय क्षति पहुंचेगी।
सुमैरा अब्दुलअली के अनुसार विज्ञापनों के माध्यम से राजस्व जुटाने की कोशिश में राज्य की प्राकृतिक सुंदरता और नागरिकों के स्वास्थ्य से समझौता करना उचित नहीं है। वे इस अधिसूचना का पुरजोर विरोध करती हैं और विस्तृत प्रस्तुति के लिए व्यक्तिगत सुनवाई की मांग भी करती हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

