अनिल देशमुख ने की सूखा प्रभावित किसानों को तत्काल आर्थिक मदद देने की मांग
मुंबई, 12 अक्टूबर (हि.स.)। महाराष्ट्र के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख ने राज्य सरकार की ओर से घोषित किए गए सूखे पर तीखी आलोचना की है। उन्होंने कहा है कि किसानों को तत्काल आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। सरकार ने आर्थिक मदद के लिए फिर से 'इंडिपेंडेंट जीआर' जारी करने की बात कहकर किसानों के जख्मों पर नमक छिड़का है।
देशमुख ने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र सरकार किसानों को केवल कागजी दिलासा दे रही है। उन्होंने कहा कि सरकार ने पिछले महीने राज्य की 358 में से 265 तहसीलों में सूखे की स्थिति घोषित की थी। सिर्फ सूखा घोषित करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि किसानों को तुरंत सीधी आर्थिक मदद दी जानी चाहिए। उन्होंने कर्नाटक सरकार का उदाहरण देते हुए कहा कि कर्नाटक सरकार ने सूखा घोषित करने के साथ ही किसानों के लिए तुरंत सीधी मदद की घोषणा भी की है। कर्नाटक ने पशुओं के लिए 25 करोड़ रुपये का एक स्पेशल फंड, मुफ्त चारा बीज किट और पीने के पानी के लिए 187 करोड़ रुपये का अलग से प्रावधान किया है। कर्नाटक सरकार ने तुरंत ज़िलाधिकारियों को 329 करोड़ रुपये और एसडीआरएफ के तहत 1,229 करोड़ रुपये मंज़ूर किए हैं। केंद्र को 3,500 करोड़ रुपये की मदद का प्रस्ताव भी भेजा है। उन्होंने आरोप लगाया कि महाराष्ट्र में महायुति सरकार ने अभी तक सूखे से राहत के उपायों के लिए कोई ठोस फंड की घोषणा नहीं की है।
देशमुख ने आरोप लगाया कि जहां खरीफ सीजन में राज्य में भयंकर सूखे की स्थिति है, वहीं महायुति सरकार द्वारा घोषित सूखा और किए गए वादे सिर्फ कागजी घोड़ों पर नाचने जैसा है। एक तरफ कर्नाटक सरकार सूखा प्रभावितों के लिए सीधी मदद और पक्के फंड दे रही है, वहीं महाराष्ट्र सरकार सिर्फ निरीक्षण और रिपोर्ट के चक्कर में किसानों को फंसा रही है। यह सरकार का सूखे से प्रभावित किसानों के साथ एक क्रूर मज़ाक है। उन्होंने चेतावनी दी है कि अगर सरकार ने तुरंत आर्थिक मदद की घोषणा नहीं की, तो सड़कों पर उतरकर कड़ा विरोध प्रदर्शन किया जाएगा।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

