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आनंद दुबे ने छोड़ी उद्धव की शिवसेना

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मुंबई, 12 अक्टूबर (हि.स.)। शिवसेना (यूबीटी) को फिर एक झटका लगा है। पार्टी प्रवक्ता आनंद दुबे ने संगठन की मौजूदा राजनीतिक दिशा और वैचारिक रुख से असहमति जताते हुए उद्धव ठाकरे का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने कहा है कि हिंदुत्व की विचारधारा से समझौता नहीं कर सकता, इसलिए मैंने शिवसेना (यूबीटी) छोड़ने का फैसला किया है।

दूबे ने पार्टी से इस्तीफा देने की घोषणा करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे की हिंदुत्व की विचारधारा और अपने राजनीतिक सिद्धांतों से समझौता करके राजनीति करना उनके लिए संभव नहीं है। पार्टी की वर्तमान राजनीतिक लाइन और उनकी वैचारिक प्रतिबद्धताओं के बीच बढ़ते मतभेदों के कारण उनके लिए पार्टी का पक्ष रखना मुश्किल हो गया था। उनका फैसला किसी व्यक्तिगत नाराजगी का परिणाम नहीं, बल्कि विचारधारा और सिद्धांतों से जुड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मैं बालासाहेब ठाकरे का शिवसैनिक हूं। मेरे लिए हिंदुत्व, विचारधारा और देश के प्रति प्रतिबद्धता महत्वपूर्ण हैं। मैं किसी ऐसी पार्टी का समर्थन नहीं कर सकता, जिसकी विचारधारा और कार्यशैली से मैं सहमत नहीं हूं। उनके लिए राजनीतिक पद और पहचान से ज्यादा महत्वपूर्ण अपनी मान्यताओं के प्रति ईमानदार रहना है।

आनंद दुबे ने कहा कि बालासाहेब ठाकरे ने पार्टी को एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान दी थी। ऐसे में कांग्रेस और राहुल गांधी के साथ बढ़ती राजनीतिक नजदीकी को लेकर उन्होंने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गठबंधन की राजनीति में शामिल होने के बावजूद किसी भी दल को अपनी मूल विचारधारा और राजनीतिक पहचान स्पष्ट रखनी चाहिए। किसी पार्टी के साथ गठबंधन करना और उसके प्रत्येक राजनीतिक रुख का समर्थन करना अलग-अलग बातें हैं।

दुबे ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के मुद्दे पर कहा कि चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े सवाल तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर उठाए जाने चाहिए। उन्होंने पारदर्शिता और संवैधानिक प्रक्रियाओं के पालन पर जोर दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की नीतियों की आलोचना करना विपक्ष का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन राजनीतिक बहस नीतियों, प्रशासन और जनहित पर केंद्रित होनी चाहिए। अंबानी और अडानी जैसे भारतीय उद्योग समूहों की आर्थिक भूमिका, निवेश और रोजगार सृजन का मूल्यांकन तथ्यों के आधार पर किया जाना चाहिए। किसी भी कारोबारी समूह की आलोचना करते समय समान मानदंड अपनाए जाने चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार