नवजात को बचाने ठाणे सिविल की टीम जी - जान से जुट गई
मुंबई,12 अगस्त ( हि.स.) । जब ज्ञात हुआ कि मां के गर्भ में बच्चे की जान को गंभीर खतरा था। स्थिति बहुत नाजुक थी। हालांकि, एक नवजात बच्चे के लिए, ठाणे सिविल हॉस्पिटल के डॉक्टरों, स्टाफ और 108 एम्बुलेंस टीम ने बिना देर किए मिलकर काम किया। उनकी कोशिशों से बच्चे को समय पर आगे का इलाज मिल सका।
शहापुर तहसील की 28 साल की महिला की सोनोग्राफी में पता चला कि बच्चे के सीने और पेट की झिल्ली में गंभीर खराबी थी। इस वजह से, पेट के कुछ अंग सीने में चले गए थे, जबकि दिल दाहिनी ओर चला गया था। स्थिति को देखते हुए, बच्चे की डिलीवरी सिविल हॉस्पिटल में ही करने का फैसला किया गया।
ठाणे जिला सिविल अस्पताल सर्जन डॉ. कैलाश पवार और अतिरिक्त जिला सिविल अस्पताल सर्जन डॉ. धीरज महानगड़े की गाइडेंस में गायनेकोलॉजी और पीडियाट्रिक्स डिपार्टमेंट ने प्लान बनाया। आगे के इलाज के लिए कौशल्या हॉस्पिटल से भी कोऑर्डिनेशन किया गया।
11 अगस्त को डॉ. सचिन घोलप, डॉ. रूपाली यादव और उनकी टीम ने सिजेरियन सेक्शन किया। जन्म के बाद बच्चे को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। डॉ. सुशील दुबे, डॉ. ऐश्वर्या मोरे, डॉ. सुरेश वानखेड़ ने तुरंत इलाज किया और बच्चे को स्टेबल किया।जैसे ही बच्चे की हालत स्थिर हुई, 108 एम्बुलेंस तैयार रखी गईं।
डॉ. बंसोडे की टीम की फुर्ती की वजह से बच्चे को सुरक्षित कौशल्या हॉस्पिटल ले जाया गया। वहां, बच्चों के डॉक्टर डॉ. संजय ओक और डॉ. संकेत कुलकर्णी, मेघा मोरे और कौशल्या हॉस्पिटल की टीम ने सर्जरी करके छाती में गए अंगों को ठीक किया और डायाफ्राम को ठीक किया।
बच्चा अभी वेंटिलेटर पर है और उसकी हालत गंभीर है। हालांकि, सिविल डॉक्टरों के समय पर लिए गए फैसलों, अलग-अलग विभागों के समन्वय और 108 सर्विस की फुर्ती की वजह से इस नवजात शिशु को समय पर आगे का इलाज मिल सका।
ठाणे सिविल सर्जन डॉ कैलाश पवार - बहुत ही गंभीर स्थिति में, सिविल के सभी विभागों ने मिलकर और तुरंत काम किया। समय पर लिए गए फैसलों और टीम समन्वय (कोऑर्डिनेशन) से बच्चे को आगे के इलाज के लिए सुरक्षित रूप से शिफ्ट किया जा सका। हमें इस मिलकर किए गए प्रयास पर गर्व है।
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हिन्दुस्थान समाचार / रवीन्द्र शर्मा

