हाइवे पर उड़ेगी ‘एयर एंबुलेंस’ , गंभीर मरीजों को मिलेगी सुरक्षा
मुंबई, 13 अक्टूबर (हि.स.)। गंभीर मरीजों को आपात काल में बड़े अस्पताल पहुंचाने के लिए महाराष्ट्र सरकार नए साल की शुरुआत में हाइवे पर ‘एयर एंबुलेंस’ सेवा उड़ाने की तैयारी में है। समृद्धि, मुंबई-पुणे और मुंबई-गोवा महामार्ग पर यह सुविधा उपलब्ध कराने की योजना है।
इस परियोजना के लिए 15 नवंबर तक एसओपी तैयार कर उसे मंजूरी दिलाने की योजना है। इसके बाद नवंबर के अंत तक उच्चाधिकार समिति की मंजूरी लेकर निविदा प्रक्रिया शुरू की जाएगी। पूरी प्रक्रिया के बाद नए साल की शुरुआत में एयर एंबुलेंस सेवा शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने प्रस्तावित सेवा की रूपरेखा पर मंगलवार को बैठक आयोजित कर विस्तृत चर्चा की। इस बैठक में स्वास्थ्य मंत्री प्रकाश आबिटकर, गृह राज्यमंत्री योगेश कदम, परिवहन आयुक्त राजेश नार्वेकर, स्वास्थ्य विभाग के निदेशक संजय काटकर, यातायात पुलिस विभाग के अधीक्षक डॉ. सुनील भारद्वाज सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
मंत्री सरनाईक ने बताया कि 15 नवंबर तक कार्यप्रणाली तैयार कर नवंबर के अंत तक निविदा प्रक्रिया शुरू करने की योजना है। एयर एंबुलेंस सेवा से महामार्गों पर आपातकालीन स्वास्थ्य व्यवस्था मजबूत होगी। हमारा उद्देश्य है कि मदद पहुंचने में देरी से किसी की जान न जाए। हर जीवन अनमोल है और हादसों में घायलों को तत्काल उपचार दिलाने के लिए सरकार प्रतिबद्ध है। मंत्री सरनाईक ने कहा कि एयर एंबुलेंस की मदद से हादसे के बाद ट्रैफिक जाम और दूरी की बाधाओं को पार करते हुए ‘गोल्डन ऑवर’ में घायलों को त्वरित इलाज दिलाया जा सकेगा। इससे इलाज में देरी कम होगी और दुर्घटनाओं में होने वाली मौत के आंकड़ों को रोका जा सकेगा।
राज्य में हर साल लगभग 15,000 सड़क दुर्घटनाएं होती हैं। इनमें कई मामलों में घायलों को समय पर उपचार उपलब्ध कराना बड़ी चुनौती बन जाता है। विशेष रूप से महामार्गों पर गंभीर दुर्घटनाएं, यातायात जाम, अस्पतालों की दूरी और आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की उपलब्धता जैसी समस्याओं को देखते हुए एक अधिक सक्षम व्यवस्था विकसित करने की आवश्यकता है। एयर एंबुलेंस सेवा के प्रभावी संचालन के लिए परिवहन विभाग, स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन संयुक्त रूप से मानक संचालन प्रक्रिया तैयार करेंगे। इसके अंतर्गत ट्रॉमा केयर सेंटरों का नेटवर्क निर्धारित करना, सेवा प्रदाताओं का पैनल बनाना, सड़क सुरक्षा निधि से आवश्यक वित्तीय प्रावधान करना और आपातकालीन प्रतिक्रिया की स्पष्ट कार्यप्रणाली विकसित करना शामिल है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

