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महाराष्ट्र में टसर सिल्क उद्योग को बढ़ावा, गडचिरोली के 2,270 आदिवासी किसान परिवारों को मिलेगा लाभ

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मुंबई, 21 जुलाई (हि.स.)। महाराष्ट्र में रेशम कारोबार को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण पहल की है। सिल्क आयुक्तालय और बीएआईएफ के संयुक्त प्रयास से गडचिरोली जिले में टसर स्पेशल डेवलपमेंट प्रोजेक्ट लागू किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य आदिवासी किसान परिवारों को रोजगार के नए अवसर उपलब्ध कराना और उनकी आय बढ़ाना है।

इस परियोजना के लिए मंत्रालय में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और टेक्सटाइल मंत्री संजय सावकारे की मौजूदगी में समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। महाराष्ट्र में मुख्य रूप से शहतूत और टसर सिल्क का उत्पादन किया जाता है। पूर्वी विदर्भ के गडचिरोली, चंद्रपुर, भंडारा और गोंदिया जिलों में लगभग 44,500 एकड़ क्षेत्र में टसर के पेड़ मौजूद हैं। वर्तमान में करीब 3,000 आदिवासी परिवार पारंपरिक टसर सिल्क कारोबार से जुड़े हुए हैं।

गडचिरोली जिले में मौजूद विशाल वन क्षेत्र, जैव विविधता और टसर रेशम के कीड़ों के लिए उपयुक्त पेड़ों की उपलब्धता को देखते हुए यहां टसर सिल्क उद्योग के विस्तार की बड़ी संभावनाएं हैं।

आदिवासी और महिला परिवारों को मिलेगा आर्थिक लाभ

बीएआईएफ ने पहले से ही अनुसूचित जनजातियों, महिला बचत समूहों और स्थानीय किसानों को प्रशिक्षण देकर टसर सिल्क उत्पादन को बढ़ावा देने का काम किया है। नई परियोजना के माध्यम से गडचिरोली जिले के 2,270 से अधिक टसर किसान परिवारों को आय के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।

इस परियोजना में अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं के आर्थिक एवं सामाजिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।

उत्पादन से लेकर वैल्यू चेन तक होगा विकास

सरकार के अनुसार, परियोजना के तहत निजी टसर अंडा उत्पादन केंद्रों की स्थापना, बीज उत्पादन, व्यावसायिक टसर उत्पादन, पोस्ट-टसर वैल्यू चेन का विकास, प्रशिक्षण, तकनीकी मार्गदर्शन और क्षमता निर्माण जैसे कार्य किए जाएंगे।

राज्य सरकार का दावा है कि यह टसर सिल्क विकास परियोजना गडचिरोली के ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मदद करेगी। इससे ‘आत्मनिर्भर आदिवासी विकास’ की दिशा में भी तेजी आएगी।

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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार