किसान कर्ज माफी के नए प्रस्ताव में जुटा प्रशासन
मुंबई, 13 जुलाई (हि.स.)। महाराष्ट्र में किसान कर्ज माफी योजना को लागू करने में तेजी आ गई है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा घोषित स्कीम में दबाव वाली शर्तों को रद्द करने के बाद अब इसे असल में लागू करने के लिए प्रशासनिक स्तर गतिविधियां शुरू हो गई हैं।
10 जुलाई को विधानसभा का मानसून सेशन खत्म होने के बाद मंगलवार को पहली कैबिनेट मीटिंग होने वाली है। इस बैठक में रिवाइज्ड कर्ज माफी का प्रस्ताव लाया जाएगा। इस पृष्ठभूमि पर मुख्य सचिव ने सहकारिता और कृषि विभाग के अधिकारियों को देर रात तक रुककर विस्तृत प्रस्ताव तैयार करने का आदेश दिया है। मुख्यमंत्री ने कर्ज माफी की घोषणा की तो शुरू में यह डर था कि कुछ तकनीक शर्तों की वजह से कई किसान लाभ से वंचित रह जाएंगे। विपक्ष, खासकर एनसीपी (एसपी) के विधायक रोहित पवार ने इस पर कड़ा एतराज जताया था और शर्तों को रद्द करने की मांग की थी। उन्होंने मांग की कि रेगुलर कर्जदारों के लिए 50 हजार की लिमिट बढ़ाई जाए और पूरा फायदा दिया जाए। किसानों ने भी आंदोलन किया था। इसे संज्ञान में लेते हुए मुख्यमंत्री ने मानसून सत्र में ऐलान किया कि सभी जटिल शर्तें खत्म करके नियमित कर्जदारों को सीधे 2 लाख रुपये तक का लाभ दिया जाएगा।
योजना का यह बदला हुआ प्रस्ताव मंगलवार की कैबिनेट मीटिंग में रखा जाएगा। मुख्यमंत्री के सुझाव के बाद मुख्य सचिव एक्शन मोड में आ गए हैं। उन्होंने दोनों विभागों के सचिवों को आदेश दिया है कि रात में घर मत जाओ, आज ही विस्तृत प्रस्ताव तैयार करो। शर्तें खत्म करने से फायदा पाने वालों की संख्या और सरकार पर कितना अतिरिक्त बोझ पड़ेगा, इसकी पूरी रिपोर्ट आज रात ही तैयार की जा रही है।
मुख्यमंत्री की घोषणा के अनुसार कुल 56 लाख किसान इसके हकदार थे। योजना के हिसाब से सरकारी खजाने पर 36,585 करोड़ रुपये का आर्थिक बोझ पड़ना था। नए बदलाव के बाद नियमित लोन चुकाने वाले किसानों के लिए इंसेंटिव लिमिट 50,000 रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दी गई है। शर्तें खत्म होने से लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 56 लाख से अधिक हो जाएगी और 36,585 करोड़ रुपये से ज्यादा के अतिरिक्त वित्तीय बोझ पर एक विस्तृत रिपोर्ट आज रात फाइनल हो जाएगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

