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पुनर्विकास परियोजनाओं की 80 इमारतों के मूल निवासियों और खरीदारों के हितों की रक्षा जरूरी

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पुनर्विकास परियोजनाओं की 80 इमारतों के मूल निवासियों और खरीदारों के हितों की रक्षा जरूरी


-अतिरिक्त मुख्य सचिव ने विधायक की मांग पर जताई सहमति

मुंबई, 22 सितंबर, (हि. स.)। वसई-विरार महानगरपालिका क्षेत्र में साल 2022 से 2025 के बीच मंजूर 80 से अधिक पुनर्विकास इमारतों के निर्माण पर रोक लगने से परियोजनाएं अटकने की आशंका पैदा हो गई है। इसकी वजह से पुरानी और खतरनाक इमारतों से पुनर्विकास के लिए अपने घर खाली कर बाहर निकले सैकड़ों नागरिकों के भविष्य पर सवालिया निशान खड़ा हो गया है। महानगरपालिका के तत्कालीन नियमों के अनुसार इन परियोजनाओं को आधिकारिक मंजूरी और 'महारेरा' का प्रमाणपत्र मिला हुआ था। इस वजह से मूल निवासी पूरी तरह निश्चिंत थे और कई अन्य नागरिकों ने भी इन प्रोजेक्ट्स में निवेश किया था।मौजूदा समय की गंभीर स्थिति को देखते हुए भाजपा विधायक राजन नाईक ने बीते दिनों मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात की थी। उन्होंने मांग की थी कि पूरी तरह से प्रतिबंध लगाना अन्यायपूर्ण है और अधिकारियों की गलतियों की सजा आम जनता को नहीं मिलनी चाहिए। उन्होंने निर्माण कार्य पर लगी रोक हटाने के साथ-साथ ओसी (भोगवटा प्रमाणपत्र) और रजिस्ट्री पर लगे प्रतिबंधों को भी रद्द करने और केवल दोषी अधिकारियों, बिल्डरों व आर्किटेक्ट्स पर कार्रवाई करने की मांग की थी। मुख्यमंत्री द्वारा इस मामले का संज्ञान लिए जाने के बाद सोमवार को अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता की अध्यक्षता में मुंबई में एक विशेष बैठक आयोजित की गई।इस महत्वपूर्ण बैठक में विधायक राजन नाईक, एमएमआरडीए के अतिरिक्त महानगर आयुक्त पी. वेलारासू, जिलाधिकारी इंदूराणी जाखड, वसई-विरार मनपा के आयुक्त पृथ्वीराज बी. पी., विधायक स्नेहा दुबे पंडित और नगर विकास विभाग के उपनिदेशक निर्मलकुमार चौधरी समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम गुप्ता ने विधायक की मांग पर सहमति जताते हुए निर्देश दिए कि आगे की कार्रवाई करते समय मूल निवासियों और खरीदारों को नुकसान पहुंचाए बिना उनके हितों की रक्षा के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि निवासियों के हित के लिए हर मामले का अलग से अध्ययन कर निर्णय लिया जाए और अंतिम या आंशिक भोगवटा प्रमाणपत्र देने जैसे विकल्पों पर विचार किया जाए।इसके अलावा, उन्होंने आशंका जताई कि कंप्यूटर सिस्टम की चेतावनियों को नजरअंदाज करके अधिकारियों ने अपने अधिकारों का गलत इस्तेमाल करते हुए यह मंजूरी दी होगी। इसलिए, इस पूरे मामले की गहन जांच करके दोषी बिल्डरों, आर्किटेक्ट्स और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो। साथ ही, वसई-विरार में 1500 एकड़ सरकारी भूमि पर विशेष आर्थिक क्षेत्र स्थापित करने के संबंध में एक रिपोर्ट सौंपने का निर्देश भी दिया गया है, जिसे इस महत्वाकांक्षी परियोजना की दिशा में पहला कदम माना जा रहा है।

हिन्दुस्थान समाचार / कुमार