भूमि अधिग्रहण मुआवजा निर्देशों का उल्लंघन हुआ तो अधिकारियों पर कार्रवाई
मुंबई, 03 नवंबर (हि.स.)। महाराष्ट्र सरकार ने भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में मुआवजे को लेकर होनी वाली देरी पर सख्त रवैया अपनाया है। संबधित अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई है कि यदि अदालत के निर्देशों पर अमल नहीं हुआ तो अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में राजस्व विभाग ने एक सर्कुलर जारी किया है।
राजस्व विभाग ने आदेश दिया है कि भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामलों में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा। जिलाधिकारी और विभागीय आयुक्त मामले की समीक्षा करेंगे। अदालत द्वारा बढ़े हुए मुआवजे के भुगतान के आदेश के बाद, अब 60 दिनों के अंदर यह तय करना ज़रूरी कर दिया गया है कि इसके खिलाफ अपील करनी है या नहीं। बेवजह देरी करने वाले अधिकारियों पर सख्ती बरती गई है।
लोकनिर्माण, इंफ्रास्ट्रक्चर, सिंचाई परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण करने के बाद किसानों और ज़मीन मालिकों को उचित मुआवजे के लिए कानूनी लड़ाई लड़नी पड़ती है। अदालत ने बढ़े हुए मुआवजे को मंज़ूरी दी है, लेकिन अपील पर फैसला करने में देरी से संबंधित लोगों को वित्तीय फायदे मिलने में मुश्किलें आती हैं। यदि प्रत्साव भेजने या अपील पर फैसला लेने में बिना किसी सही वजह के विलंब होता है, तो संबंधित अधिकारियों के ख़िलाफ़ प्रिवेंशन ऑफ़ डिले एक्ट, 2005 की धारा 10 के तहत कार्रवाई की जाएगी।
राजस्व विभाग ने आदेश दिया है कि हर कार्यालय में एक अलग रजिस्टर रखना होगा, जिसमें अदालत के फैसले की तारीख, अतिरिक्त मुआवज़े की राशि और केस में कार्रवाई की टाइम लिमिट दर्ज हो। साथ ही जिस केस के 60 दिन से अधिक हो गए हैं, उसकी समीक्षा जिलाधिकारी और विभागीय आयुक्त स्तर पर की जाएगी। राजस्व विभाग ने विभिन्न चरणों के लिए जिम्मेदारियां और समय सीमा भी निर्धारित कर दी है।
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हिन्दुस्थान समाचार / वी कुमार

