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विश्व आदिवासी दिवस पर भोपाल के दशहरा मैदान में उमड़ा जनसैलाब, 22 से अधिक संगठनों के हजारों लोग हुए शामिल

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विश्व आदिवासी दिवस पर भोपाल के दशहरा मैदान में उमड़ा जनसैलाब, 22 से अधिक संगठनों के हजारों लोग हुए शामिल


आदिवासी भीख नहीं, अपना अधिकार मांगता है : उमंग सिंघार

भोपाल, 09 अगस्त (हि.स.)। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर रविवार को राजधानी भोपाल का टीटी नगर दशहरा मैदान आदिवासी एकता, संस्कृति और स्वाभिमान का गवाह बना। मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के तत्वावधान में आयोजित विशाल आदिवासी सम्मेलन में 22 से अधिक संगठनों के प्रतिनिधियों सहित हजारों की संख्या में आदिवासी समाज के लोग शामिल हुए। पारंपरिक वेशभूषा, ढोल-मांदल की थाप और आदिवासी नृत्य-संगीत ने पूरे आयोजन को जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम में मध्य प्रदेश आदिवासी विकास परिषद के अध्यक्ष एवं मप्र विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। सम्मेलन से पहले राजधानी के अलग-अलग क्षेत्रों से आदिवासी समाज के लोगों ने रैलियां निकालीं। छह अलग-अलग स्थानों से निकली रैलियां टीटी नगर दशहरा मैदान पहुंचीं। न्यू मार्केट सहित विभिन्न मार्गों पर युवाओं की टोली ढोल-मांदल और डीजे की धुन पर नाचते-गाते हुए कार्यक्रम स्थल की ओर बढ़ी।

‘नेता प्रतिपक्ष के नाते नहीं, समाज का हिस्सा होने के नाते आया हूं’

आदिवासी समाज को संबोधित करते हुए उमंग सिंघार ने कहा कि “मैं यहां नेता प्रतिपक्ष के नाते नहीं, बल्कि समाज का हिस्सा होने के नाते आया हूं।” उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में आदिवासी समाज की आबादी 22 प्रतिशत से अधिक है, इसके बावजूद समाज को आज भी उसके अधिकारों से वंचित रखा जा रहा है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व को कमजोर करने की कोशिशों के खिलाफ सभी को एकजुट होकर अपनी संस्कृति, परंपरा और अधिकारों की रक्षा करनी होगी। सिंघार ने कहा कि वे स्वयं आदिवासी समाज से आते हैं और उन्हें मालूम है कि आदिवासी गांवों में लोग किन कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रहे हैं। उन्होंने कहा, “आदिवासी समाज स्वाभिमानी समाज है। आदिवासी भीख नहीं मांगता, वह अपना अधिकार मांगता है।”

‘आदिवासी कोड की लड़ाई एक बार नहीं, 100 बार लड़ेंगे’

आदिवासी कोड की मांग को लेकर सिंघार ने कहा कि जब अंग्रेजों के समय आदिवासियों के लिए अलग कोड की व्यवस्था थी, तो आज आदिवासी समाज को उसका अपना कोड क्यों नहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि आदिवासी कोड समाज की पहचान और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है। उन्होंने कहा, “हम आदिवासी समाज के लिए आदिवासी कोड की लड़ाई लड़ेंगे। हमें आने वाली पीढ़ी को आदिवासी कोड देना है। किसी ने मुझसे कहा कि आप राजनीतिक पार्टी में हैं, फिर आदिवासी कोड की बात क्यों करते हैं? मैंने साफ कहा कि मैं आदिवासी अधिकारों की बात एक बार नहीं, 100 बार करूंगा।”

नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि मध्यप्रदेश का आदिवासी युवा अब जाग चुका है। वह अपने अधिकार, पहचान और भविष्य को लेकर सजग है तथा अपने अधिकार हासिल करना जानता है। उन्होंने समाज से एकजुट होकर संवैधानिक अधिकारों, संस्कृति और परंपराओं की रक्षा के लिए आगे आने का आह्वान किया।

रैलियों में दिखा आदिवासी समाज का उत्साह

विश्व आदिवासी दिवस के कार्यक्रम में शामिल होने के लिए भोपाल के आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आदिवासी समाज के लोग रैलियों के रूप में दशहरा मैदान पहुंचे। पारंपरिक परिधानों में सजे युवाओं और महिलाओं ने ढोल-मांदल की थाप पर नृत्य किया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने आयोजन में आदिवासी गौरव और स्वाभिमान की झलक दिखाई।

रैलियां केकड़िया-नीलबड़ से अटल पथ, झिरी से कजलीखेड़ा, कोलार रोड, चूना भट्टी, कोलार तिराहा, मैनिट और माता मंदिर होते हुए दशहरा मैदान पहुंचीं। वहीं महाबली नगर (सतपुड़ा भवन) से शौर्य स्मारक, लिंक रोड, रोशनपुरा और रंगमहल चौराहा होते हुए भी बड़ी संख्या में लोग कार्यक्रम स्थल पहुंचे। पूरे आयोजन में आदिवासी समाज की एकजुटता, सांस्कृतिक विरासत और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश प्रमुखता से सामने आया।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे