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महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार अपनी मंशा स्पष्ट करे: मुकेश नायक

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महिला आरक्षण के मुद्दे पर केंद्र सरकार अपनी मंशा स्पष्ट करे: मुकेश नायक


मध्य प्रदेश, 17 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय के मीडिया कक्ष में शुक्रवार काे आयोजित पत्रकार वार्ता में महिला आरक्षण को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों और मंशा पर तीखे सवाल उठाए गए। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस मीडिया विभाग के अध्यक्ष मुकेश नायक और अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के पैनलिस्ट अभय दुबे ने संयुक्त रूप से अपनी बात रखी।

मुकेश नायक ने महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने के मुद्दे पर केंद्र सरकार से स्पष्ट रुख अपनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम को लेकर देश में भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है, जबकि इसका उद्देश्य संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाना है।

उन्होंने याद दिलाया कि वर्ष 2023 में पारित संविधान संशोधन में स्पष्ट प्रावधान था कि महिला आरक्षण लागू करने से पहले जनगणना और उसके बाद परिसीमन की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। नायक के अनुसार, वर्तमान परिस्थितियां यह संकेत दे रही हैं कि केंद्र सरकार अपने ही तय मानकों से पीछे हटती दिखाई दे रही है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि जब महिला आरक्षण विधेयक की अधिसूचना जारी की जा चुकी है, तो उसी विषय से जुड़े संशोधन विधेयक को लोकसभा में लाने का औचित्य क्या है। उनके मुताबिक, यह पूरी प्रक्रिया राजनीतिक उद्देश्य से प्रेरित प्रतीत होती है, जिससे न केवल भ्रम की स्थिति बन रही है बल्कि सरकार की नीयत पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

मुकेश नायक ने आगे कहा कि यह विधेयक वास्तविक रूप से महिला आरक्षण के बजाय परिसीमन से अधिक जुड़ा हुआ नजर आता है, जिस पर महिला आरक्षण का आवरण डाला जा रहा है। उन्होंने यह भी पूछा कि आखिर ऐसा क्या बदला है कि 2023 में भविष्य की जनगणना की बात करने वाली सरकार अब 2011 की जनगणना के आधार की ओर लौटती दिख रही है।

वहीं, अभय दुबे ने विधिक प्रक्रिया को लेकर गंभीर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि किसी कानून की अधिसूचना जारी किए बिना उसका संशोधन करना संवैधानिक दृष्टि से सवालों के घेरे में आता है। उन्होंने याद दिलाया कि जब यह अधिनियम प्रस्तुत किया गया था, तब प्रधानमंत्री द्वारा 33 प्रतिशत आरक्षण का आश्वासन दिया गया था और सभी दलों ने इसका समर्थन भी किया था—साथ ही यह शर्त भी स्पष्ट थी कि पहले जनगणना, फिर परिसीमन और उसके बाद ही आरक्षण लागू किया जाएगा।

दुबे ने आरोप लगाया कि वर्तमान में बिना पर्याप्त कानूनी स्पष्टता के एकतरफा निर्णय लेने का प्रयास हो रहा है, जो लोकतांत्रिक प्रक्रिया के विपरीत है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र सरकार जातिगत जनगणना से बचने का प्रयास कर रही है, जो सामाजिक न्याय की अवधारणा के खिलाफ है।

इस दौरान कांग्रेस नेताओं ने महिला आरक्षण के मुद्दे पर पारदर्शिता, स्पष्ट समयसीमा और विधिक प्रक्रिया का पालन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे