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महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत, भोपाल में भाजपा की जन आक्रोश पदयात्रा, सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं

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महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत, भोपाल में भाजपा की जन आक्रोश पदयात्रा, सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं


महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत, भोपाल में भाजपा की जन आक्रोश पदयात्रा, सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं


महिला आरक्षण पर गरमाई सियासत, भोपाल में भाजपा की जन आक्रोश पदयात्रा, सड़कों पर उतरीं हजारों महिलाएं


मुख्यमंत्री डाॅ. माेहन यादव, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल समेत महिला मंत्री और नेत्रियां हुई शामिल

भोपाल, 20 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को महिला आरक्षण विधेयक के समर्थन और उसके पारित न हो पाने के विरोध में भारतीय जनता पार्टी की ‘जन आक्रोश महिला पदयात्रा’ निकाली गई। इस पदयात्रा में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल, प्रदेश सरकार की महिला मंत्री, महिला सांसद और बड़ी संख्या में महिला कार्यकर्ता शामिल हुईं।

यह पदयात्रा एमवीएम कॉलेज ग्राउंड से शुरू होकर लोक भवन होते हुए रोशनपुरा चौराहे तक पहुंची, जहां काले गुब्बारे उड़ाकर इसका समापन किया गया। पूरे मार्ग में महिला कार्यकर्ताओं ने नारे लगाकर विरोध दर्ज कराया।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों से जुड़े मुद्दे पर समाज बेहद संवेदनशील है। उन्होंने कहा, “नारी बहुत कुछ सह सकती है, लेकिन अपना अपमान कभी नहीं भूलती।” मुख्यमंत्री ने आरोप लगाया कि महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक के पारित न होने पर विपक्ष ने खुशी जताई, जो महिलाओं के सम्मान के खिलाफ है। उन्होंने इस मुद्दे पर विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर निंदा प्रस्ताव लाने की भी बात कही। मुख्यमंत्री डाॅ. यादव ने कहा कि प्रियंका गांधी बड़ी-बड़ी बातें करती थीं कि मैं नारी हूं, लड़ सकती हूं। लेकिन वह बड़ी-बड़ी बातें कहां गईं, जब आपने बहनों के अधिकारों को फांसी देने का काम किया। राहुल गांधी के पिताजी ने भी 40 साल पहले तीन तलाक लागू कर बहनों के अधिकारों पर डाका डाला था। यही कांग्रेस का अतीत है।

वहीं भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने कहा कि महिलाओं के अधिकारों को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से आह्वान किया कि वे लोगों के बीच जाकर इस विषय पर संवाद करें और सवाल उठाएं कि महिलाओं के सम्मान और अधिकारों के प्रति राजनीतिक दलों का रुख क्या है। हेमंत खंडेलवाल ने कहा- माता, बहनों के हक पर जो डाका डाला है, उसकी नजीर विपक्ष ने पेश की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी चाहते थे कि देश की बहनों को उनका हक मिले। लेकिन जब फैसला लागू करने का समय आया तो विपक्ष ने इसमें रोड़ा अटकाने का काम किया। प्रधानमंत्री ने महिलाओं को ग्राम पंचायत, नगरीय निकायों में 50% आरक्षण दिया। वे चाहते थे कि संसद और विधानसभा में भी हमारी 33% बहनें बैठें। इसके लिए हमारी तरफ से सारी तैयारी थी लेकिन हमारी पार्टी और सरकार की सोच पर विपक्ष ने कुठाराघात किया।

बीजेपी महिला मोर्चा की प्रदेश अध्यक्ष अश्वनी परांजपे ने इसे महिलाओं के सम्मान की लड़ाई बताते हुए कहा कि यह पदयात्रा केवल विरोध नहीं, बल्कि जागरूकता और अधिकारों के प्रति आवाज उठाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि मातृशक्ति अपने सम्मान से जुड़े मुद्दों पर चुप नहीं रहेगी। पंचायत राज्यमंत्री राधा सिंह अपनी बेटी के साथ पदयात्रा में शामिल हुईं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को अपने अधिकारों के लिए आज भी संघर्ष करना पड़ रहा है। वहीं मंत्री प्रतिमा बागरी और अन्य नेताओं ने भी इस मुद्दे पर अपनी बात रखते हुए महिला सशक्तिकरण की दिशा में निरंतर प्रयासों की आवश्यकता जताई। मंत्री प्रतिमा बागरी ने कहा कि कांग्रेस समेत विपक्षी पार्टियों ने महिलाओं को हक देने का विरोध किया है। हम सड़कों पर उतरकर उसका विरोध कर रहे हैं।

सागर लोकसभा सीट से सांसद लता वानखेड़े ने कहा मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की सरकार ने महिला सशक्तिकरण की दिशा में ठोस कदम उठाए हैं। मैं आज एक महिला के रूप में करोड़ों बहनों की आवाज बनकर खड़ी हूं। आज का दिन महिला अधिकार और सम्मान की लड़ाई का दिन है। ये केवल बिल नहीं बल्कि महिलाओं को पंचायत से पार्लियामेंट तक पहुंचने का दरवाजा था, जिसे कांग्रेस और इंडी गठबंधन ने बंद कर दिया। विपक्ष को महिलाओं का सशक्तिकरण नहीं चाहिए। ये वही लोग हैं, जो मंच पर महिलाओं की बात करके बड़ी-बड़ी घोषणाएं करते हैं। लेकिन इनकी सोच है कि महिलाएं सिर्फ भीड़ का हिस्सा रहें। तालियां बजाएं, महिलाएं नेतृत्व न करें।

यात्रा के दौरान गर्मी को देखते हुए व्यवस्थाएं भी की गईं, वहीं बड़ी संख्या में महिलाओं की मौजूदगी के कारण कुछ स्थानों पर भीड़ प्रबंधन की स्थिति भी बनी रही।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे