home page

सागर और मकरोनिया में पानी सप्लाई को लेकर टाटा कंपनी का अनुबंध होगा समाप्त

 | 
सागर और मकरोनिया में पानी सप्लाई को लेकर टाटा कंपनी का अनुबंध होगा समाप्त


सागर, 01 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सागर जिले में बुधवार को कलेक्ट्रेट में कलेक्टर प्रतिभा पाल की अध्यक्षता में आयोजित उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जनता के हित को सर्वाेपरि रखते हुए 'प्रोजेक्ट-6बी सागर-मकरोनिया जलप्रदाय उन्नयन योजना' की क्रियान्वयन एजेंसी टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड का अनुबंध समाप्त (टर्मिनेट) करने का बड़ा निर्णय लिया गया है।

इस संबंध में कलेक्टर ने मध्य प्रदेश अर्बन डेवलपमेंट कंपनी को नियमानुसार विधिवत नोटिस जारी कर आगामी सख्त कार्रवाई प्रस्तावित करने के निर्देश दिए हैं। टाटा कंपनी की विदाई के बाद अब सागर नगर निगम और मकरोनिया नगर पालिका अपने-अपने क्षेत्रों में आत्मनिर्भर रहकर पूरी प्लानिंग के साथ पानी की सप्लाई की व्यवस्था खुद संभालेंगे।

बैठक में महापौर संगीता सुशील तिवारी, निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार, मकरोनिया नगर परिषद अध्यक्ष मिहीलाल अहिरवार, नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री सहित एमपीयूडीसी और अन्य संबंधित प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान नगर निगम आयुक्त राजकुमार खत्री ने बताया कि नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के प्रमुख अभियंता को विस्तृत प्रतिवेदन भेजकर टाटा प्रोजेक्ट लिमिटेड के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की मांग की गई है। एशियन डेवलपमेंट बैंक की वित्तीय सहायता से संचालित इस जलप्रदाय योजना के संचालन एवं संधारण में कंपनी द्वारा लगातार गंभीर लापरवाही बरती जा रही थी, जिससे पूरे शहर की पेयजल व्यवस्था प्रभावित हो रही थी।

महापौर श्रीमती संगीता तिवारी ने कहा कि अनुबंध में 24×7 (24 घंटे) जलप्रदाय की शर्त होने के बावजूद एक वर्ष से अधिक समय बीत जाने पर भी शहर में केवल एक दिन छोड़कर जलापूर्ति की जा रही है। इससे नागरिकों में भारी असंतोष है और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर शिकायतों का अंबार लगा हुआ है। इसके साथ ही जलकर देयकों के वितरण एवं उपभोक्ताओं के डेटा प्रबंधन में गंभीर लापरवाही बरती गई, जिससे बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं का रिकॉर्ड ई-नगर पालिका पोर्टल पर दर्ज नहीं हो सका और जलकर की बड़ी वसूली लंबित रह गई।

प्रशासनिक समीक्षा में कंपनी के तकनीकी और वित्तीय स्तर पर भी कई गंभीर खामियां उजागर हुईं।

अतिरिक्त वित्तीय भार: नगर निगम अध्यक्ष वृन्दावन अहिरवार ने बताया कि पाइपलाइन संधारण का कार्य समय पर नहीं होने से नगर निगम को अपने संसाधनों से मरम्मत कार्य कराना पड़ रहा है। प्रस्तावित पाइपलाइन विस्तार पूर्ण नहीं होने से निगम पर अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ा है।

दूषित पानी का खतरा: अधिकारियों ने आशंका जताई कि पाइपलाइन एवं उपभोक्ता कनेक्शन कार्यों में तकनीकी मानकों का पालन नहीं किए जाने के कारण भविष्य में गंभीर लीकेज और दूषित जलापूर्ति का संकट खड़ा हो सकता है।

बिना अनुमति सब-लेटिंग: यह बात भी सामने आई कि टाटा प्रोजेक्ट्स ने नगर निगम की अनुमति के बिना संचालन संबंधी कार्य अन्य एजेंसी 'ब्लू वेंचर' को सौंप दिए, जिससे व्यवस्था और पटरी से उतर गई। हाल ही में कंपनी द्वारा वाल्वमैनों का भुगतान न किए जाने के कारण पूरे शहर की जलापूर्ति ठप हो गई थी।

भारी-भरकम खर्च की मांग: वित्तीय विसंगतियों पर बात करते हुए अधिकारियों ने बताया कि टाटा प्रोजेक्ट्स ने महज डेढ़ वर्ष के कार्य के लिए 12 करोड़ रुपये के भुगतान की मांग की है, जबकि नगर निगम स्वयं यह कार्य प्रतिवर्ष लगभग 4 से 5 करोड़ रुपये की लागत में संचालित करता रहा है।

कलेक्टर प्रतिभा पाल ने स्पष्ट किया कि निगम परिषद द्वारा एक माह के भीतर व्यवस्थाएं सुधारने के निर्देश दिए जाने के बावजूद कंपनी की कार्यप्रणाली में कोई सुधार नहीं हुआ, जिसके चलते अब टर्मिनेशन का कड़ा कदम उठाया जा रहा है।

इस पूरी प्रक्रिया में कोई कानूनी अड़चन न आए, इसके लिए बैठक में निकाय और कंपनी के बकाया पेमेंट को भी नियमानुसार सेटल करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही कलेक्टर ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि एक सप्ताह के भीतर पानी सप्लाई से जुड़ी सभी प्रक्रियाओं को पूरी तरह स्ट्रीमलाइन (व्यवस्थित) कर लिया जाए, जिससे ग्रीष्मकाल या आगामी दिनों में जनता को बिना किसी रुकावट के सुचारू रूप से पानी मिल सके।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / मनीष कुमार चौबे