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अनूपपुर: सोन नदी में 3 दिनों से बह रहा सफेद परत से पानी हुआ झागदार, जलीय जीवों की सुरक्षा पर सवाल

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अनूपपुर: सोन नदी में 3 दिनों से बह रहा सफेद परत से पानी हुआ झागदार, जलीय जीवों की सुरक्षा पर सवाल


अनूपपुर, 03 नवंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की प्रमुख नदियों में सोन नदी में पिछले तीन दिनों से सफेद झागदार पदार्थ बहकर आने की जानकारी आ रही है। नदी की सतह पर दूर-दूर तक फैली सफेद झाग और मटमैली परत दिखाई देने से जल प्रदूषण की आशंका बढ़ गई है। नदी का पानी सामान्य से अलग नजर आ रहा है। लगातार ऐसी स्थिति बने रहने से पानी की गुणवत्ता और जलीय जीवों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।

मंगलवार को सोन नदी का एक वीडियो भी सामने आया है, जिसमें पानी की सतह पर सफेद झागदार पदार्थ दूर तक फैला दिखाई दे रहा है। कई जगह झाग की मोटी परत पानी के बहाव के साथ आगे बढ़ती नजर आ रही है। हालांकि, यह पदार्थ किसी रासायनिक अपशिष्ट के कारण बन रहा है या इसके पीछे कोई अन्य वजह है, इसकी पुष्टि अभी नहीं हुई है। वास्तविक स्थिति का पता लगाने के लिए पर्यावरण योजना एवं समन्वय संगठन (ईपीसीओ) भोपाल की टीम पानी के नमूनों की वैज्ञानिक जांच के लिए अनूपपुर आ रही है।

औद्योगिक अपशिष्ट या नाले से दूषित पानी आने की आशंका

पिछले तीन दिनों से नदी में झागदार पदार्थ दिखाई देने के बाद आशंका जताई जा रही है कि किसी औद्योगिक इकाई, नाले या अन्य स्रोत से दूषित पानी नदी में छोड़ा जा रहा हो सकता है। हालांकि, अभी तक इसके स्रोत और रासायनिक प्रकृति की जानकारी सामने नहीं आई है। पानी में झाग बनने के पीछे डिटर्जेंट, औद्योगिक अपशिष्ट, कार्बनिक पदार्थ या प्राकृतिक कारण भी हो सकते हैं। ऐसे में केवल झाग देखकर किसी विशेष केमिकल की मौजूदगी का दावा नहीं किया जा सकता।

जलीय जीवों और नदी पर निर्भर लोगों की सुरक्षा का सवाल

सोन नदी आसपास के क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक जल स्रोत है। नदी के पानी का उपयोग कृषि, पशुओं और अन्य जरूरतों के लिए किया जाता है। ऐसे में यदि पानी में हानिकारक प्रदूषक मौजूद हैं, तो इसका असर जलीय जीवों के साथ-साथ नदी पर निर्भर लोगों पर भी पड़ सकता है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से जांच कराने की मांग

लगातार सामने आ रही इस स्थिति को देखते हुए मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन से नदी के पानी के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच कराने की मांग की जा रही है। जांच में पानी का पीएच स्तर, घुलित ऑक्सीजन, रासायनिक ऑक्सीजन मांग और अन्य प्रदूषक तत्वों की मौजूदगी का परीक्षण किया जाना जरूरी है। इसके साथ ही नदी के ऊपरी हिस्सों में संभावित प्रदूषण स्रोतों की पहचान भी की जानी चाहिए, ताकि झागदार पदार्थ के वास्तविक स्रोत का पता चल सके।

फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि सोन नदी में तीन दिनों से बहकर आ रहा सफेद झाग आखिर क्या है और कहां से आ रहा है? इसका जवाब पानी की प्रयोगशाला जांच और प्रशासनिक पड़ताल के बाद ही मिल सकेगा।

हर्षल पंचोली कार्यकारी निदेशक, पर्यावरण नियोजन एवं समन्वय संगठन (एप्को), भोपाल ने मंगलवार काे कहां कि एक टीम भेज रहे हैं प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड से जो इसकी जांच कर रिर्पोट देगा।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला