मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 का वॉल वर्जन का किया लोकार्पण
- विक्रमादित्य वैदिक घड़ी में 21 लाख वर्ष पहले एवं आगामी 5 लाख वर्षों तक की कालगणना
- मुख्यमंत्रीजी को भेंट की गई वैदिक रिस्ट वॉच
भोपाल, 04 सितम्बर (हि.स.) । मध्य प्रदेश शासन, संस्कृति विभाग अंतर्गत श्रीकृष्ण पाथेय न्यास द्वारा श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के अवसर पर शुक्रवार को राजधानी भोपाल स्थित मुख्यमंत्री निवास में आयोजित विशेष कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 के वॉल वर्जन का लोकार्पण किया। इसमें लगभग 21 लाख वर्ष पूर्व तक की पंचांगीय गणनाओं का अध्ययन करने तथा आगामी लगभग 5 लाख वर्षों तक की कालगणना देखने की सुविधा विकसित की गई है।
दरअसल, विगत दिनों काशी विश्वनाथ मंदिर में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के अवलोकन के दौरान माननीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा विक्रमादित्य वैदिक घड़ी और अधिक परिष्कृत करने तथा प्राचीन काल की गणनाओं को इसमें समाहित करने का सुझाव दिया गया था। इसी क्रम में विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 को विकसित किया गया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के मार्गदर्शन एवं मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव नेतृत्व में दुनिया में पहली बार ऐसी वैदिक घड़ी विकसित की गयी है जिसमें त्रेतायुग, द्वापरयुग से लेकर वर्तमान काल तक के विशाल कालखंड को भारतीय कालगणना के संदर्भ में समझने का प्रयास किया गया है। इस अवसर पर महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी एवं वैदिक क्लॉक रिस्ट वॉच के अन्वेषणकर्ता मयंक पाटीदार ने मुख्यमंत्री डॉ. यादव को वैदिक रिस्ट वॉच भेंट की।
महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 भारतीय वैदिक कालगणना, पंचांग, ज्योतिषीय गणित और खगोलीय घटनाओं को आधुनिक डिजिटल तकनीक के माध्यम से एक ही प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध कराने का उन्नत प्रयास है। इसमें लगभग 19 प्रमुख वैदिक एवं पंचांगीय तत्वों को समाहित किया गया है। घड़ी में वैदिक समय के साथ मुहूर्त, कला, काष्ठा, सूर्योदय, सूर्यास्त, चंद्रोदय, चंद्रास्त, सूर्य राशि, चंद्र राशि, तिथि, पक्ष, हिंदू मास, नक्षत्र, योग, करण, चौघड़िया तथा प्रमुख हिंदू त्योहार और व्रत की जानकारी प्राप्त की जा सकती है। वृद्धि तिथि, अधिक मास और क्षय मास जैसी जटिल पंचांगीय गणनाओं को भी इसमें शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि इस घड़ी की सबसे महत्वपूर्ण विशेषताओं में इसकी दीर्घकालीन कालगणना क्षमता शामिल है। इसमें लगभग 21 लाख वर्ष पूर्व तक की पंचांगीय गणनाओं का अध्ययन करने तथा आगामी लगभग 5 लाख वर्षों तक की कालगणना देखने की सुविधा विकसित की गई है। निर्धारित तिथि के आधार पर उस समय की तिथि, पक्ष, नक्षत्र, योग, करण, हिंदू मास और अन्य कालगणनात्मक विवरणों को देखा जा सकता है।
निदेशक ने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी 2.0 में सूर्य और चंद्रमा के साथ नवग्रहों की स्थिति, राशि एवं नक्षत्र में गोचर, ग्रहों के परिवर्तन तथा मार्गी-वक्री गति जैसी जानकारियाँ भी प्रदर्शित की गयी हैं। इसकी मूल कालगणना प्रणाली ऑफलाइन कार्य करने के लिए विकसित की गई है, इसलिए निरंतर इंटरनेट कनेक्शन की आवश्यकता नहीं रहती।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 को अब वॉल क्लॉक के साथ-साथ आधुनिक स्मार्ट रिस्ट वॉच के रूप में भी विकसित किया गया है। रिस्ट वॉच में स्थान, अक्षांश और देशांतर के आधार पर वैदिक समय तथा पंचांग संबंधी जानकारियाँ उपलब्ध होती हैं। इसमें एक विशेष एनर्जी फीचर भी जोड़ा गया है, जिसमें शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक, आत्मिक और कार्मिक ऊर्जा के विश्लेषण का मॉडल शामिल है। यह मॉडल जन्म तिथि, जन्म समय और जन्म स्थान तथा संबंधित ज्योतिषीय गणनाओं के आधार पर दैनिक परिवर्तन का आकलन प्रस्तुत करता है।
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी-2.0 भारतीय ज्ञान परंपरा, खगोलीय गणित और आधुनिक डिजिटल एवं पहनने योग्य तकनीक के समन्वय का अभिनव प्रयास है। इसका उद्देश्य प्राचीन भारतीय कालगणना को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए विरासत से विकास की संकल्पना को साकार करना है।
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हिन्दुस्थान समाचार / उम्मेद सिंह रावत

