अनूपपुर: हाथी की घुसपैठ से परेशान ग्रामीण, रात में जंगल से निकल फसलों को बना रहे आहार
अनूपपुर, 05 फ़रवरी (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में विगत 45 दिनों से तीन हाथियों का समूह दो अलग-अलग भागों में बट कर अनूपपुर एवं जैतहरी तहसील के क्षेत्र विचरण कर रहा है। ये हाथी दिन में जंगल में और रात होते ही खेतों में लगी फसलो को अपना आहार बनाते है। वहीं एक हाथी फसलो को रौदते हुए खाया, जबकि दो हाथी विगत 5 दिनों से जंगल में डेरा डाले हुए हैं। बुधवार-गुरूवार की रात्रि एक अकेला हाथी को भगाए जाने के दौरान ग्रामीणों द्वारा फेंकने पर अपने पैरों से जलता हुआ पटाखा पैर से दबाकर नष्ट कर देता था।
वन्य प्राणी संरक्षक शशिघर अग्रवाल ने गुरुवार को बताया कि जिले में तीन हाथियों का समूह दो अलग-अलग भागों में बट कर ग्रमीण क्षेत्रों में फसलो और घरों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। विगत 5 दिनों से एक दांत वाला एक नर हाथी वन परिक्षेत्र अनूपपुर के सोनमौहरी बीट के जंगल में डेरा डाले हुए हैं जो दिन में जंगल और रात को जंगल से निकल कर फसलों को अहार बना रहा हैं। ग्राम पंचायत अमगवां के डोंगरीटोला में गणेश सिंह मार्को के खेत में लगी गेहूं ,अरहर की फसल को निरंतर चार दिनों से आहार बना रहा है। जिसे भगाने के लिए ग्रामीणों द्वारा हो-हल्ला एवं पटाखा जलाकर फेंकने पर हैं तेजी से बढ़कर अपने पैरों से जलता हुआ पटाखा को दबा कर नष्ट कर देता है तथा ग्रामीणों को तेजी से चिंघाड़ते हुए दौड़ाता है निरंतर कई घंटे तक खेतों में खाने के बाद जंगल में चला जाता है।
बुधवार-गुरूवार की रात यह हाथी चौथे दिन जंगल से निकल कर गणेश सिंह के खेत में गेहूं एवं अरहर को खाते हुए खेत में रखें सिंचाई वाले पाइप को उठाकर अरहर के खेत में ले गया। ग्रामीणों द्वारा इस हाथी को खेत से बाहर करने के लिए कई तरह के प्रयोग किया जो नाकाम हो गए। लोगों के भगाए जाने के बाद कुछ देर सोनमौहरी के जंगल में ठहर कर फिर ग्राम पंचायत सेंदुरी के संजय चर्मकार के घर के पास पहुंचकर ईट की दीवार तोड़कर आंगन में लगे केला के पेड़ों तथा बोरी में रखें धान के कोढा को खाते हुए ग्राम पंचायत सेंदुरी के रामलखन राठौर एवं दिनेश राठौर के खेतों में लगी गेहूं की फसल को खाया गुरुवार की सुबह होने के सोनमौहरी वृक्षारोपण वाले जंगल में जाकर विश्राम कर रहा है।
वहीं इसके दो साथी पांच दिनों से वन परिक्षेत्र जैतहरी के वन बीट धनगवां अंतर्गत ग्राम पंचायत क्योटार के जंगल में डेरा डाले हुए हैं। ऐसा लग रहा हैं कि जंगल ठहरकर अपने एक हाथी साथी के आने का इंतजार कर रहे हैं। हाथियों के निरंतर विचरण पर अलग-अलग गश्ती दल हाथियों के विचरण पर तथा ग्रामीणों के साथ निगरानी रखते हुए ग्रामीण जनों को हाथियों के नजदीक नहीं जाने कच्चे घरों में नहीं रहने सतर्कता एवं सावधानी बरतने की अपील की हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

