विक्रम उत्सव का ग्रैंड फिनाले, महादेव नदी कथा से लेकर आतिशबाजी तक दिखेगा भव्य नजारा
उज्जैन, 18 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन में विक्रम उत्सव-2026 के तहत गुरुवार शाम शिप्रा तट एक बार फिर भव्य आयोजन का साक्षी बनेगा। सृष्टि आरंभ दिवस और उज्जयिनी गौरव दिवस के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम में नृत्य-नाट्य, संगीत, ड्रोन शो और आतिशबाजी के साथ परंपरा और आधुनिकता का अनूठा मेल देखने को मिलेगा।
उज्जैन में विक्रम उत्सव 2026 के पहले चरण का समापन 19 मार्च की शाम 7 बजे शिप्रा तट पर होने वाले भव्य आयोजन के साथ होगा। सृष्टि आरंभ दिवस और उज्जयिनी गौरव दिवस के रूप में आयोजित इस कार्यक्रम को लेकर शहर में खासा उत्साह है। कार्यक्रम की शुरुआत महादेव नदी कथा की नृत्य-नाट्य प्रस्तुति से होगी, जिसमें शिप्रा नदी और भगवान शिव की महिमा का मंचन किया जाएगा। इसके बाद पाश्र्वगायक विशाल मिश्रा प्रस्तुति देंगे। आयोजन में आकर्षण के रूप में ड्रोन शो और भव्य आतिशबाजी भी शामिल है, जो शिप्रा तट के आसमान को रोशनी से भर देगी। इस अवसर पर सम्राट विक्रमादित्य अलंकरण प्रदान किया जाएगा और विक्रम पंचांग 2083 सहित कई महत्वपूर्ण प्रकाशनों का लोकार्पण भी होगा।
कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि होंगे। उनके साथ संस्कृति एवं पर्यटन राज्यमंत्री धर्मेन्द्र सिंह लोधी, प्रभारी मंत्री गौतम टेटवाल, सांसद अनिल फिरोजिया, राज्यसभा सांसद उमेशनाथ महाराज, विधायक अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर मुकेश टटवाल सहित कई जनप्रतिनिधि उपस्थित रहेंगे।
प्रात: 5.30 बजे होगी कोटि सूर्योपासनागुरुवार सुबह 5.30 बजे रामघाट और दत्त अखाड़ा पर कोटि सूर्योपासना के साथ दिनभर के आयोजनों की शुरुआत होगी। कार्यक्रम का आयोजन नवसंवत्सर अभिनंदन समारोह समिति और अन्य संस्थाओं के सहयोग से किया जा रहा है। प्रदेश के सभी जिला मुख्यालयों पर भी सामूहिक सूर्योपासना और विक्रम संवत आधारित आयोजन होंगे। महाराजा विक्रमादित्य शोध पीठ और संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित यह उत्सव 30 जून तक चलेगा। पहले चरण में धार्मिक, सांस्कृतिक और अकादमिक कार्यक्रमों के साथ व्यापार मेले और वन मेले का आयोजन किया गया, जिसमें स्थानीय उत्पादों और नवाचारों को मंच मिला।
आज से उत्सव का दूसरा चरणउत्सव के दूसरे चरण की शुरुआत गुरुवार से जल गंगा संवर्धन अभियान से होगी। इसके तहत जल संरक्षण, पर्यावरण जागरूकता और नदियों के पुनर्जीवन से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। अभियान में किसानों को जल प्रबंधन, प्राकृतिक खेती और संसाधन संरक्षण के लिए प्रेरित किया जाएगा। उत्सव में अब तक 5000 से अधिक कलाकार भाग ले चुके हैं और लाखों लोग विभिन्न कार्यक्रमों में शामिल हुए हैं। 50 से अधिक कॉन्सर्ट, नृत्य प्रस्तुतियां, मेले, अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव और विज्ञान सम्मेलन इस आयोजन को प्रदेश के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में शामिल करते हैं।
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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्वेल

