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विदिशा में आरक्षण और यूजीसी नियमों के विरोध में प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर पुलिस से झड़प

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विदिशा में आरक्षण और यूजीसी नियमों के विरोध में प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर पुलिस से झड़प


विदिशा में आरक्षण और यूजीसी नियमों के विरोध में प्रदर्शन, बैरिकेडिंग पर पुलिस से झड़प


विदिशा, 24 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के विदिशा में आरक्षण व्यवस्था, यूजीसी के नए नियमों और एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग को लेकर शनिवार को सर्व समाज एकता मंच के आह्वान पर प्रदर्शन किया गया। बंद के आह्वान के बीच पीतल मिल, रामलीला क्षेत्र और मुख्य बाजार में कई दुकानें बंद रहीं।

प्रदर्शनकारियों ने रैली निकालकर कलेक्ट्रेट की ओर बढ़ने की कोशिश की। इस दौरान पुलिस ने तिलक चौक, देवी के बाग और स्वामी विवेकानंद चौराहे पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया। आगे बढ़ने को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झूमाझटकी हुई। स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। इसके बाद प्रदर्शनकारी कलेक्ट्रेट पहुंचे और एसडीएम को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने ज्ञापन के माध्यम से आर्थिक आधार पर आरक्षण देने, मौजूदा आरक्षण व्यवस्था में बदलाव करने, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन, यूजीसी के नए नियम वापस लेने और सवर्ण आयोग का गठन करने की मांग की। उनका कहना था कि नीतियों और कानूनों की समीक्षा करते समय आर्थिक रूप से कमजोर लोगों के हितों और सामाजिक समरसता का ध्यान रखा जाना चाहिए।

आर्थिक आधार पर आरक्षण देने की मांग

भाजपा नेता शशांक भार्गव ने कहा कि सर्व समाज के साथ मिलकर आर्थिक आधार पर आरक्षण देने और जाति आधारित आरक्षण व्यवस्था में बदलाव की मांग उठाई गई है। उनके अनुसार, आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए, चाहे वे किसी भी समाज से हों। भार्गव ने कहा कि सरकार किसी भी दल की हो, यदि कोई नीति आम जनता के हितों के अनुरूप नहीं है तो उसका विरोध किया जाना चाहिए। उन्होंने आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए व्यवस्था में सुधार और कानून बनाते समय सामाजिक समरसता का ध्यान रखने की जरूरत बताई।

एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग भी उठाई

सर्व समाज एकता मंच के सदस्यों ने एससी-एसटी एक्ट में संशोधन की मांग करते हुए कानून के कथित दुरुपयोग को रोकने के लिए उचित प्रावधान करने की बात कही। प्रदर्शनकारियों ने कुछ मामलों में कथित झूठी शिकायतों और आर्थिक सहायता से जुड़े प्रावधानों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि कानूनों की समीक्षा इस तरह होनी चाहिए कि किसी निर्दोष व्यक्ति को परेशानी का सामना न करना पड़े। ये प्रदर्शनकारियों की ओर से रखी गई मांगें और आरोप हैं।

मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन बढ़ाने की चेतावनी

सपाक्स के जिला सचिव परवेंद्र शर्मा ने कहा कि सर्व समाज एकता मंच के माध्यम से आरक्षण व्यवस्था में सुधार, एससी-एसटी एक्ट में संशोधन और यूजीसी के नए नियम वापस लेने की मांग की गई है। उन्होंने बताया कि प्रदर्शनकारी राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम ज्ञापन देने जा रहे थे, लेकिन रास्ते में उन्हें रोकने का प्रयास किया गया। शर्मा ने चेतावनी दी कि यदि मांगों पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन को देशभर में आगे बढ़ाया जाएगा। प्रदर्शनकारियों ने सवर्ण आयोग के गठन की मांग दोहराते हुए कहा कि आरक्षण, कानून और शैक्षणिक नियमों से जुड़े निर्णयों में सभी वर्गों के हितों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे