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रीवा : विंध्य के जंगलों में भीषण आग, बुझाने में जुटे दमकल कर्मी और वन्य प्रेमी

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रीवा : विंध्य के जंगलों में भीषण आग, बुझाने में जुटे दमकल कर्मी और वन्य प्रेमी


रीवा, 27 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश के रीवा सहित विंध्य क्षेत्र के अन्य जिलों में कैमोर पर्वत श्रृंखला के जंगलों में लगी भीषण आग ने वन संपदा और वन्यजीवों के सामने गंभीर संकट खड़ा कर दिया है। कई स्थानों पर पिछले एक सप्ताह से धधक रही आग अब विकराल रूप ले चुकी है।

रीवा जिले के गोविंदगढ़ क्षेत्र अंतर्गत तुहिता माठी, भौर और किंग गर्नत श्रृंखला के जंगल आग की चपेट में हैं। हजारों एकड़ क्षेत्र में फैली वन संपदा जल रही है, जबकि बेजुबान वन्य जीवों का अस्तित्व भी खतरे में पड़ गया है।

सात दिन बाद भी नहीं बुझी आग

आग लगे सात दिन बीत चुके हैं, लेकिन अब तक उस पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका है। विंध्य पर्वत के बड़े हिस्से तक आग फैल चुकी है। धुएं के कारण आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को सांस लेने में परेशानी हो रही है और वायु प्रदूषण का स्तर भी बढ़ गया है।

स्थानीय लोग भी मैदान में उतरे

जब सरकारी प्रयास कम पड़ते नजर आए तो स्थानीय समाजसेवी और नागरिक भी राहत कार्य में जुट गए। समाजसेवी पीयूष त्रिपाठी और राहुल शर्मा नगर परिषद गोविंदगढ़ की फायर ब्रिगेड टीम के साथ मिलकर आग बुझाने में लगे हुए हैं। दिन-रात की मशक्कत के बाद शिकारमा पहाड़ी के एक हिस्से को सुरक्षित किया गया है, लेकिन दुर्गम पहाड़ी इलाकों में आग अब भी तेजी से फैल रही है।

ड्रोन और हेलीकॉप्टर से मदद की मांग

वन्यजीव प्रेमियों और विशेषज्ञों का कहना है कि परंपरागत तरीकों से इतनी बड़ी आग पर काबू पाना कठिन है। शासन-प्रशासन से मांग की गई है कि ड्रोन तकनीक या हेलीकॉप्टर के माध्यम से पानी और फायर रिटार्डेंट का छिड़काव कराया जाए।

मैहर जिले में भी फैली आग

मैहर जिले की अमरपाटन तहसील अंतर्गत भीष्मपुर और ओबरा क्षेत्र के कैमोर जंगलों में भी भीषण आग लगी हुई है। यह आग धीरे-धीरे अमरपाटन, गोरा, रामगढ़ होते हुए ताला क्षेत्र की ओर बढ़ रही है। यदि समय रहते आग पर नियंत्रण नहीं पाया गया तो जंगल में रहने वाले जीव-जंतु, पशु-पक्षी और आसपास बसे लोगों के घरों को भी नुकसान पहुंच सकता है।

वन विभाग पर उठे सवाल

स्थानीय नागरिकों में वन विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर नाराजगी है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते संयुक्त स्तर पर राहत और बचाव अभियान नहीं चलाया गया तो विंध्य क्षेत्र के हरे-भरे जंगल राख में तब्दील हो सकते हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी