home page

उज्जैन: रजत चंद्र-त्रिशूल और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, राजा स्वरूप में दिए दर्शन

 | 
उज्जैन: रजत चंद्र-त्रिशूल और त्रिपुंड से सजे बाबा महाकाल, राजा स्वरूप में दिए दर्शन


उज्जैन, 27 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैनस्थितविश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में मंगलवार तड़के चार बजे भगवान महाकाल के कपाट खोले गए। वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भस्म आरती की शुरुआत हुई। सबसे पहले गर्भगृह में विराजित देवी-देवताओं का पूजन किया गया। इसके बाद भगवान महाकाल का हरि ओम जल से अभिषेक कर दूध, दही, घी, शक्कर, शहद और फलों के रस से बने पंचामृत से पूजन किया गया। भांग अर्पित करने के बाद बाबा महाकाल का रजत चंद्र-त्रिशूल, त्रिपुंड और आकर्षक आभूषणों से राजा स्वरूप में शृंगार किया गया।

भगवान के मस्तक पर त्रिपुंड और रजत चंद्र-त्रिशूल सुशोभित किए गए। शेषनाग का रजत मुकुट, रजत मुंडमाल और रुद्राक्ष की माला अर्पित की गई। सुगंधित पुष्पों और ड्रायफ्रूट से बाबा का अलंकरण किया गया। विशेष शृंगार के बाद भगवान महाकाल का दिव्य स्वरूप भक्तों के आकर्षण का केंद्र रहा। पूजन-अभिषेक के पश्चात फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया।

डमरू-झांझ की गूंज के बीच भस्म आरती

भस्म आरती के दौरान मंदिर परिसर में झांझ, मंजीरे और डमरू की ध्वनि गूंजती रही। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई। परंपरानुसार भस्म अर्पण के बाद भगवान का विशेष पूजन किया गया। इस दौरान श्रद्धालु बाबा महाकाल के जयकारे लगाते रहे। जयकारों से मंदिर परिसर भक्तिमय हो गया।

मान्यता है कि भस्म अर्पित करने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी आस्था के साथ श्रद्धालु भस्म आरती में शामिल होकर बाबा महाकाल का आशीर्वाद लेते हैं।

नंदी के कान में कही मनोकामना

भस्म आरती में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे। भक्तों ने भगवान महाकाल के दर्शन किए और नंदी हॉल में विराजित नंदी महाराज का पूजन किया। धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धालु नंदी के कान में अपनी मनोकामना कहते हैं और उसके पूर्ण होने की प्रार्थना करते हैं। सुबह से ही मंदिर में दर्शन-पूजन का क्रम जारी रहा। बाबा महाकाल के राजा स्वरूप के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने आशीर्वाद लिया।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे