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दमोहः समान नागरिक संहिता पर उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न वर्गों से लिया फीडबैक

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दमोहः समान नागरिक संहिता पर उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न वर्गों से लिया फीडबैक


दमोहः समान नागरिक संहिता पर उच्च स्तरीय समिति ने विभिन्न वर्गों से लिया फीडबैक


दमोह, 04 जून (हि.स.)। मध्य प्रदेश में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) को लेकर चल रही जन-परामर्श प्रक्रिया के तहत गुरुवार को दमोह में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। पीएमश्री कॉलेज के सभागार में आयोजित इस कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता के अध्ययन एवं परीक्षण के लिए गठित उच्च स्तरीय समिति के सदस्य एवं विधि विशेषज्ञ अनूप नायर ने विभिन्न वर्गों के नागरिकों के साथ संवाद स्थापित कर उनके सुझाव प्राप्त किए।

बैठक में बड़ी संख्या में अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों, मीडिया प्रतिनिधियों तथा विभिन्न समाजों के पदाधिकारियों ने भाग लिया। कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य समान नागरिक संहिता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर जनता की राय जानना और भविष्य के लिए व्यवहारिक सुझाव एकत्र करना था।

अनूप नायर ने कहा कि भारत जैसे विविधताओं वाले देश में नागरिक अधिकारों और पारिवारिक कानूनों को लेकर लंबे समय से चर्चा होती रही है। वर्तमान में विवाह, तलाक, भरण-पोषण, उत्तराधिकार और दत्तक ग्रहण जैसे विषय अलग-अलग धार्मिक समुदायों के व्यक्तिगत कानूनों के अनुसार संचालित होते हैं। ऐसे में समान नागरिक संहिता का विचार सभी नागरिकों को समान कानूनी अधिकार प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

उन्होंने कहा कि संविधान के नीति निदेशक तत्वों में शामिल अनुच्छेद-44 राज्य को समान नागरिक संहिता लागू करने के प्रयास करने की प्रेरणा देता है। संविधान निर्माताओं ने भी भविष्य में ऐसी व्यवस्था की कल्पना की थी, जिससे नागरिक अधिकारों में समानता स्थापित हो सके।

बैठक में अनूप नायर ने स्पष्ट किया कि समिति का उद्देश्य किसी समुदाय विशेष के धार्मिक विश्वासों या परंपराओं में हस्तक्षेप करना नहीं है। समिति केवल उन विषयों पर नागरिकों की राय एकत्र कर रही है, जो सीधे तौर पर पारिवारिक और नागरिक अधिकारों से जुड़े हैं। उन्होंने कहा कि समान नागरिक संहिता पर कोई भी निर्णय व्यापक जन-सुझावों और अध्ययन के आधार पर ही लिया जाएगा।

कार्यक्रम में उपस्थित नागरिकों ने भी खुलकर अपने विचार व्यक्त किए। कई वक्ताओं ने महिलाओं को समान अधिकार मिलने, पारिवारिक विवादों के त्वरित समाधान और कानूनों में एकरूपता की आवश्यकता पर बल दिया। वहीं कुछ प्रतिभागियों ने विभिन्न समुदायों की परंपराओं और सांस्कृतिक विशेषताओं को भी ध्यान में रखने की आवश्यकता बताई।

बैठक में विवाह पंजीयन, तलाक प्रक्रिया, उत्तराधिकार कानून, भरण-पोषण, दत्तक ग्रहण तथा लिव-इन रिलेशनशिप जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। समिति सदस्यों ने उपस्थित लोगों की जिज्ञासाओं का समाधान करते हुए उनके सुझावों को दर्ज किया।

अनूप नायर ने नागरिकों से अपील की कि वे इस महत्वपूर्ण विषय पर अपने सुझाव लिखित रूप में अथवा ऑनलाइन माध्यम से भी भेज सकते हैं। उन्होंने बताया कि समिति द्वारा प्राप्त सभी सुझावों का परीक्षण और विश्लेषण किया जाएगा, जिसके बाद विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर राज्य शासन को सौंपी जाएगी।

बैठक के अंत में विभिन्न सामाजिक संगठनों, अधिवक्ताओं, शिक्षाविदों एवं नागरिकों ने आशा व्यक्त की कि जन-परामर्श की यह प्रक्रिया समाज के सभी वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करेगी और भविष्य में बनने वाली किसी भी नीति को अधिक समावेशी और प्रभावी बनाने में सहायक सिद्ध होगी।

हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव