मप्रः यूसीसी पर कांग्रेस ने मांगी स्पष्टता मांगी, उमंग सिंघार बाेले: दलित-आदिवासी अधिकारों से समझौता हुआ तो संघर्ष होगा
भाेपाल, 09 अप्रैल (हि.स.)। मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) और गेहूं खरीदी के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए तीखे सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि यूसीसी के नाम पर दलितों और आदिवासियों के अधिकारों और परंपराओं की अनदेखी की गई, तो यह उनके साथ गंभीर अन्याय होगा और इसके खिलाफ व्यापक संघर्ष किया जाएगा।
नेता प्रतिपक्ष सिंघार ने गुरुवार काे मीडिया से बातचीत करते हुए कहा कि समान नागरिक संहिता को लेकर प्रदेश की भारतीय जनता पार्टी सरकार को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने पूछा कि क्या इस कानून में दलित और आदिवासी समुदायों की पहचान, परंपराएं और रीति-रिवाज सुरक्षित रहेंगे या उन्हें एक समान ढांचे में जबरन समाहित किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि इन समुदायों के अधिकारों की अनदेखी की गई, तो भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस इस मुद्दे पर मजबूती से आवाज उठाएगी और संघर्ष करेगी।
इसके साथ ही नेता प्रतिपक्ष ने गेहूं खरीदी में देरी को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि खरीदी में देरी से प्रदेश के किसान गंभीर संकट में हैं, खासकर छोटे किसान, जिनके पास भंडारण की पर्याप्त सुविधा नहीं है। एक महीने की देरी के कारण उन्हें मजबूरी में अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचनी पड़ी।
सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों का लाभ किसानों तक पहुंचने के बजाय बिचौलियों और एजेंटों को मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 400 रुपये प्रति क्विंटल का जो लाभ किसानों को मिलना चाहिए था, वह दलालों की जेब में जा रहा है, जो सीधे तौर पर कमीशनखोरी का मामला है। उन्होंने यह भी कहा कि बड़े किसानों पर अनावश्यक प्रतिबंध लगाकर खरीदी को सीमित किया जा रहा है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि सरकार की कथनी और करनी में बड़ा अंतर है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे

