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त्रिशूल-डमरू, त्रिपुंड और भांग-चंदन से सजे महाकाल, भस्म अर्पण के बाद रजत शेषनाग मुकुट और मुंडमाल से हुआ श्रृंगार

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त्रिशूल-डमरू, त्रिपुंड और भांग-चंदन से सजे महाकाल, भस्म अर्पण के बाद रजत शेषनाग मुकुट और मुंडमाल से हुआ श्रृंगार


उज्जैन, 27 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन स्थित विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर में रविवार तड़के चार बजे भस्म आरती के दौरान भगवान महाकाल का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म आरती में बाबा महाकाल को त्रिशूल, त्रिपुंड और डमरू के साथ भांग-चंदन अर्पित किया गया। इसके बाद रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष और सुगंधित पुष्पों की मालाओं से भगवान का अलंकरण किया गया। भस्म आरती के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।

मंदिर के पट खुलते ही पुजारी और पुरोहितों ने गर्भगृह में स्थापित देवी-देवताओं का पूजन किया। इसके बाद भगवान महाकाल का जलाभिषेक कर दूध, दही, घी, शहद, शक्कर और फलों के रस से तैयार पंचामृत से अभिषेक किया गया। भांग और चंदन अर्पित कर भगवान का विशेष श्रृंगार किया गया। भस्म अर्पण से पहले प्रथम घंटाल बजाया गया और हरिओम का जल अर्पित किया गया। मंत्रोच्चार और ध्यान के बाद कपूर आरती हुई। इसके बाद ज्योतिर्लिंग को वस्त्र से ढंककर भस्म अर्पित की गई। महा निर्वाणी अखाड़े की ओर से भगवान महाकाल को भस्म अर्पित की गई।

भस्म आरती के बाद भगवान महाकाल को रजत शेषनाग मुकुट, रजत मुंडमाल, रुद्राक्ष की माला और मोगरे-गुलाब के सुगंधित पुष्पों की मालाएं अर्पित की गईं। फल और मिष्ठान का भोग लगाया गया। मान्यता है कि भस्म अर्पण के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं।

जयकारों से गूंजा मंदिर परिसर

भस्म आरती में पहुंचे श्रद्धालुओं ने बाबा महाकाल के दर्शन किए और आशीर्वाद लिया। श्रद्धालुओं ने नंदी महाराज के दर्शन कर उनके कान के समीप अपनी मनोकामनाएं कही। इस दौरान मंदिर परिसर बाबा महाकाल के जयकारों से गूंजता रहा।

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हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे