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अनूपपुर: अपर नर्मदा बांध के खिलाफ आदिवासी हुंकार, सड़क से सदन तक

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अनूपपुर: अपर नर्मदा बांध के खिलाफ आदिवासी हुंकार, सड़क से सदन तक


विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा में निरस्तगी की रखी मांग

अनूपपुर, 01 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर एवं डिंडोरी जिले में अपर नर्मदा बांध परियोजना शोभापुर अब सिर्फ एक सरकारी फाइल नहीं, बल्कि आदिवासी अस्तित्व की लड़ाई बन चुकी है। दोनो जिले के हजारों प्रभावित किसान सड़क पर है, आवाज अब विधानसभा तक पहुंच चुकी है। जल-जंगल-ज़मीन पर मंडराते खतरे के बीच भारत आदिवासी पार्टी ने सत्ता के सन्नाटे को तोड़ते हुए संघर्ष का बिगुल फूंक दिया है।

भारत आदिवासी पार्टी के अनूपपुर जिला अध्यक्ष ललन सिंह परस्ते ने रविवार को बताया कि अपर नर्मदा बांध परियोजना शोभापुर के खिलाफ लंबे समय से सुलग रहा आदिवासी आक्रोश अब विस्फोटक रूप ले चुका है। डिंडोरी और अनूपपुर जिले के प्रभावित किसानों ने साफ कर दिया है कि वे अपने गांव, जंगल और जमीन को डूबने नहीं देंगे। भारत आदिवासी पार्टी ने इस मुद्दे को नई धार दे रहीं है। 30 जनवरी को पुष्पराजगढ़ में विरोध प्रर्दशन के बाद अब विधायक कमलेश्वर डोडियार ने ऐलान किया कि यह लड़ाई सड़क से सदन तक लड़ी जाएगी। जो मध्यप्रदेश विधानसभा में गूंज चुका है। हजारों परिवारों के विस्थापन, जल-जंगल-जमीन की बर्बादी और आदिवासी अधिकारों के कुचले जाने का मुद्दा जब सदन के पटल पर आया, तो क्षेत्र में उम्मीद की लौ जली है कि अब फैसला जनता के पक्ष में भी हो सकता है।

विधानसभा में उठी अवाज

भारत आदिवासी पार्टी के विधायक कमलेश्वर डोडियार ने विधानसभा में बताया कि हजारों आदिवासी परिवारों के विस्थापन, पुश्तैनी जमीनों के डूब क्षेत्र में जाने और आजीविका पर पड़ने वाले प्रहार को बेनकाब किया है। यह महज भाषण नहीं था, बल्कि उस दर्द की अभिव्यक्ति थी जिसे वर्षों से फाइलों में दबाया गया है। सदन में उठी यह आवाज अब गांव-गांव तक उम्मीद बनकर पहुंच रही है कि शायद इस बार आदिवासी समाज की सुनी जाएगी, न कि उसे फिर से बहला-फुसलाकर चुप कराया जाएगा।

9 मार्च को सागर टोला में आमसभा

9 मार्च को पड़ोसी जिले डिंडोरी के सागर टोला में विशाल आमसभा की घोषणा भारत आदिवासी पार्टी ने की हैं। जिसे राजस्थान के बांसवाड़ा से सांसद राजकुमार रौत और सैलाना विधायक कमलेश्वर डोडियार संबोधित करेंगे। यह लड़ाई अब स्थानीय नहीं रही, बल्कि राज्य और देश के आदिवासी आंदोलन का प्रतीक बन रही है।

कांग्रेस-भाजपा की चुप्पी, आदिवासियों से गद्दारी

भारत आदिवासी पार्टी के अनूपपुर जिला अध्यक्ष ललन सिंह परस्ते ने कहा कि भारत आदिवासी पार्टी का आरोप है कि वर्षों से सत्ता में रही कांग्रेस और भाजपा ने आदिवासी समाज को सिर्फ वोट बैंक समझा है। जब जल-जंगल-जमीन बचाने की बारी आई, तो दोनों दलों के विधायक और सांसद खामोश रहे है। परियोजना में निजी लाभ तलाशने के आरोपों ने राजनीतिक माहौल को और गरमा दिया है। अगर समय रहते आवाज नहीं उठाई गई, तो आने वाली पीढ़ियां माफ नहीं करेंगी। यह चुप्पी अब सवालों के घेरे में है और जवाब जनता मांग रही है।

जिला अध्यक्ष ललन सिंह परस्ते ने बताया कि अनूपपुर और डिंडोरी के संयुक्त रूप से साझा प्रतिरोध का मंच होगा। गांव-गांव से लोग जुटने को तैयार हैं। किसान, महिलाएं, युवाओ सबका एक ही सवाल है कि क्या विकास के नाम पर हमें उजाड़ दिया जाएगा? यह एकजुटता बता रही है कि अब आदिवासी समाज बंटकर नहीं, बल्कि संगठित होकर लड़ेगा। यह लड़ाई पार्टी की नहीं, जनता की है। अगर लोग साथ आएंगे, तभी सांसद और विधायक सदन में प्रभावी दबाव बना पाएंगे और इस बांध परियोजना को निरस्त कराया जा सकेगा। उन्होंने जनता से आह्वान किया कि डर और भ्रम को छोड़कर अपने हक के लिए खड़े हों। संदेश साफ है कि अब या तो जनता बोलेगी, या फिर इतिहास एक और विस्थापन की कहानी लिख देगा साथ ही कहा है कि जनता द्वारा चुने गए विधायक सांसद आज अगर पटल पर इस समस्या को समय के साथ पटल में रखे होते हो किसानों को किसानी छोड़ कर सड़क में नहीं उतरना पड़ता भीड़ देख कर राजनीतिक रोटियां सेकना जनप्रतिनिधि बंद कर देवे अब आदिवासी समाज जाग चुका है इस आपदा को अवसर बनाने में लगे क्षेत्र के विधायक सांसद भूल में न रहे अब समाज जाग चुका है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला