ट्रैवल मार्ट-2026 से ग्वालियर-चंबल के पर्यटन को मिलेगी नई उड़ान, विदेशी बाजार तक पहुंचेगी विरासत
मुरैना, 13 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के ऐतिहासिक और ग्रामीण पर्यटन स्थलों को व्यापक पहचान दिलाने की दिशा में मध्य प्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। भोपाल में 7 से 10 अक्टूबर तक आयोजित इस आयोजन के तहत देश-विदेश से आए पर्यटन प्रतिनिधियों ने ग्वालियर-चंबल अंचल का भ्रमण किया। प्रतिनिधियों ने यहां के ऐतिहासिक किलों, प्राचीन मंदिरों, ग्रामीण होमस्टे, पारंपरिक हस्तशिल्प और लोक संस्कृति को करीब से जाना। इस पहल से क्षेत्र के पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ने की संभावनाएं बढ़ी हैं।
मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड की ओर से आयोजित ट्रैवल मार्ट के अंतर्गत पर्यटन प्रतिनिधियों के लिए प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थलों की परिचयात्मक यात्राएं कराई गईं। इसी क्रम में गुजरात के अहमदाबाद, महाराष्ट्र के मुंबई और ठाणे, आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तथा दिल्ली से आए प्रतिनिधियों ने ग्वालियर-चंबल क्षेत्र का दौरा किया।
दल ने ग्वालियर किले सहित प्रमुख ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण किया। इसके बाद प्रतिनिधि मुरैना जिले के बटेश्वर, पढ़ावली और मितावली पहुंचे। यहां उन्होंने प्राचीन मंदिरों, स्थापत्य कला और क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत का अवलोकन किया। भ्रमण के दौरान उन्हें चंबल अंचल की सांस्कृतिक विविधता और गौरवशाली इतिहास को समझने का अवसर मिला।
18 ग्रामीण होमस्टे बने पर्यटन का आधार
मुरैना जिले में ग्रामीण पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए मध्यप्रदेश पर्यटन बोर्ड और रागिनी फाउंडेशन के सहयोग से रिठोराकलां, ऐंती और मितावली गांवों में 18 ग्रामीण होमस्टे विकसित किए गए हैं। इनका उद्देश्य पर्यटकों को ग्रामीण जीवनशैली से परिचित कराने के साथ स्थानीय परिवारों के लिए रोजगार और आय के अवसर उपलब्ध कराना है।
ग्राम ऐंती स्थित सहजन होमस्टे में पर्यटन प्रतिनिधियों का पारंपरिक ग्रामीण आतिथ्य के साथ स्वागत किया गया। प्रतिनिधियों ने ग्रामीण परिवारों के साथ बैठकर स्थानीय व्यंजनों का स्वाद लिया और खेती-किसानी, पारंपरिक खान-पान, रीति-रिवाजों तथा ग्रामीण जीवन से जुड़ी जानकारियां प्राप्त कीं।
इस अनुभव ने प्रतिनिधियों को ग्रामीण परिवेश में रहकर स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को समझने का अवसर दिया। ग्रामीण होमस्टे के माध्यम से पर्यटक केवल ऐतिहासिक स्थलों का भ्रमण ही नहीं, बल्कि स्थानीय समाज और जीवनशैली से भी जुड़ सकते हैं।
मिट्टी के बर्तन और दरी निर्माण की कला से हुए परिचित
परिचयात्मक यात्रा के दौरान पर्यटन प्रतिनिधियों को चंबल क्षेत्र की पारंपरिक कलाओं और हस्तशिल्प से जोड़ने के लिए विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गईं। प्रतिनिधियों ने स्थानीय कारीगरों से माटी कला और दरी निर्माण की पारंपरिक तकनीकों की जानकारी ली। उन्होंने इन कलाओं को स्वयं आजमाकर कारीगरों के हुनर और पारंपरिक शिल्प की बारीकियों को समझने का प्रयास किया।
स्थानीय लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी प्रतिनिधियों को क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। लोकगीतों और पारंपरिक कलाओं के माध्यम से उन्हें चंबल अंचल की सांस्कृतिक पहचान को करीब से जानने का अवसर मिला। इन गतिविधियों ने यात्रा को केवल ऐतिहासिक स्थलों के भ्रमण तक सीमित न रखकर एक व्यापक सांस्कृतिक अनुभव बनाया।
स्थानीय परिवारों और कारीगरों को मिलेंगे अवसर
ग्वालियर-चंबल अंचल में ऐतिहासिक धरोहरों, ग्रामीण आतिथ्य, हस्तशिल्प और लोक संस्कृति का समन्वय पर्यटन विकास की नई संभावनाएं पैदा कर सकता है। पर्यटन प्रतिनिधियों के इस भ्रमण से क्षेत्र के प्रमुख स्थलों और ग्रामीण होमस्टे को व्यापक पर्यटन बाजार से जोड़ने की संभावनाओं को बल मिला है।
ऐसे प्रयासों से पर्यटकों की आवाजाही बढ़ने के साथ स्थानीय कारीगरों, ग्रामीण परिवारों और महिला स्व-सहायता समूहों के उत्पादों को भी व्यापक बाजार मिल सकता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय के नए अवसर विकसित करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
ग्वालियर का ऐतिहासिक किला, मुरैना के बटेश्वर, पढ़ावली और मितावली के प्राचीन मंदिर, ग्रामीण होमस्टे, पारंपरिक खान-पान और लोक कलाओं को एक साथ प्रस्तुत कर क्षेत्र को विशिष्ट पर्यटन गंतव्य के रूप में विकसित किया जा सकता है। मध्यप्रदेश ट्रैवल मार्ट-2026 के माध्यम से इन संभावनाओं को देश-विदेश के पर्यटन प्रतिनिधियों के सामने रखने का अवसर मिला है। अब इन प्रयासों को पर्यटन गतिविधियों के विस्तार और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में बदलना महत्वपूर्ण होगा।
हिन्दुस्थान समाचार/उपेंद्र
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

