home page

पर्यटन विभाग के ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के टेंडर पर सवाल, कांग्रेस ने की सीबीआई जांच की मांग

 | 
पर्यटन विभाग के ‘आशीर्वाद का दिया’ कार्यक्रम के टेंडर पर सवाल, कांग्रेस ने की सीबीआई जांच की मांग


-कांग्रेस महासचिव ने टेंडर प्रक्रिया और खर्च को लेकर उठाए सवाल, संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक करने की मांग

भोपाल, 16 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के ‘आशीर्वाद का दिया’ दीपोत्सव कार्यक्रम के टेंडर आवंटन और खर्च को लेकर कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। प्रदेश कांग्रेस महासचिव अमित शर्मा शुक्रवार काे प्रदेश कांग्रेस कार्यायल में पत्रकार वार्ता काे संबाेधित करते हुए टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग की है।

उन्होंने कहा कि टेंडर जारी करने से लेकर कंपनी के चयन, कार्यादेश और भुगतान तक की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि सरकारी खर्च और निर्णयों की पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

अमित शर्मा ने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के जन्मदिन पर आयोजित कार्यक्रम के लिए टेंडर प्रक्रिया में निर्धारित नियमों का पालन नहीं किया गया और कुछ कंपनियों को अनुचित लाभ पहुंचाने की आशंका है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने सरकार से संबंधित दस्तावेज सार्वजनिक कर पूरी प्रक्रिया की स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।

टेंडर की समय-सीमा और कंपनी के चयन पर सवाल

अमित शर्मा के अनुसार, 16 सितंबर को पर्यटन विभाग ने दोपहर 3:46 बजे ईमेल के माध्यम से कंपनियों को टेंडर जारी किया था और उसी दिन शाम 5 बजे तक प्रस्ताव जमा करने की समय-सीमा तय की गई थी। उन्होंने दावा किया कि निर्धारित समय-सीमा के बाद भी प्रक्रिया जारी रही और उसी रात अहमदाबाद की कंपनी ‘गो बनाना’ को काम आवंटित करने का आदेश जारी कर दिया गया।

प्रदेश कांग्रेस महासचिव ने कहा कि यदि प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुरूप नहीं हुई है, तो यह गंभीर विषय है। उन्होंने मांग की कि टेंडर जारी करने, प्रस्ताव जमा करने, उनके मूल्यांकन और कार्यादेश जारी करने से संबंधित सभी दस्तावेज सार्वजनिक किए जाएं। साथ ही, यह भी बताया जाए कि कितनी कंपनियों ने टेंडर में भाग लिया और चयन किन मानदंडों के आधार पर किया गया।

4.18 करोड़ रुपये के टेंडर और कुल खर्च का हिसाब मांगा

कांग्रेस महासचिव ने टेंडर की राशि और विभिन्न कंपनियों की ओर से दिए गए प्रस्तावों को लेकर भी सवाल उठाए। उनके मुताबिक, मुख्य टेंडर की राशि करीब 4.18 करोड़ रुपये बताई गई है, जबकि दिल्ली की कंपनी ‘दीपाली डिजाइन’ की ओर से करीब 8.18 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिए जाने की जानकारी सामने आई है। उन्होंने इन राशियों और प्रस्तावों से जुड़े दस्तावेजों की जांच कराने की मांग की।

अमित शर्मा ने कहा कि उज्जैन में आयोजित दीपोत्सव कार्यक्रम पर हुए वास्तविक खर्च का विस्तृत ब्योरा सामने आना चाहिए। उन्होंने सवाल किया कि कार्यक्रम के विभिन्न मदों में कितनी राशि खर्च हुई, कार्यादेश के अनुसार कितना भुगतान किया गया और क्या कोई अतिरिक्त बिल भी प्रस्तुत किए गए। उन्होंने कुल खर्च बढ़कर 10 से 18 करोड़ रुपये तक पहुंचने की आशंका जताते हुए इसकी स्वतंत्र जांच और वित्तीय ऑडिट कराने की मांग की।

अधिकारियों की भूमिका की जांच की मांग

अमित शर्मा ने पर्यटन विभाग के अधिकारियों देवेंद्र राय और राहुल अर्गल की भूमिका की भी निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने कहा कि जांच में टेंडर प्रक्रिया से जुड़े सभी अधिकारियों और संबंधित पक्षों की भूमिका तथ्यों के आधार पर देखी जानी चाहिए। किसी को दोषी ठहराने से पहले दस्तावेजों और साक्ष्यों के आधार पर जांच पूरी करना जरूरी है।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मध्य प्रदेश में इवेंट मैनेजमेंट, पर्यटन और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम करने वाली कंपनियों के रहते बाहरी राज्यों की कंपनियों को काम देने के लिए कौन-से मानदंड अपनाए गए। शर्मा ने कहा कि सरकारी कार्यों में स्थानीय कंपनियों और युवाओं को भी निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा का अवसर मिलना चाहिए।

सीबीआई जांच और वित्तीय ऑडिट की मांग

अमित शर्मा ने सरकार से पांच प्रमुख मांगें रखीं। इनमें टेंडर और भुगतान प्रक्रिया की सीबीआई जांच, टेंडर से जुड़े दस्तावेज सार्वजनिक करना, संबंधित अधिकारियों की भूमिका की जांच, कार्यक्रम के वास्तविक खर्च का विस्तृत ऑडिट और सरकारी कार्यों में स्थानीय कंपनियों को समान अवसर देना शामिल है। उन्होंने कहा कि सरकारी आयोजनों पर खर्च होने वाली राशि जनता के कर से आती है, इसलिए उसके उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही जरूरी है। प्रदेश की वित्तीय स्थिति को देखते हुए प्रत्येक खर्च का उचित हिसाब सार्वजनिक किया जाना चाहिए।

शर्मा ने कहा कि सरकार को आरोपों पर स्थिति स्पष्ट करते हुए निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करनी चाहिए। इससे टेंडर प्रक्रिया, कंपनी के चयन और कार्यक्रम पर हुए वास्तविक खर्च को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब मिल सकेगा। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस मामले में जवाबदेही की मांग जारी रखेगी।

---------------

हिन्दुस्थान समाचार / नेहा पांडे