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पन्ना: आपसी संघर्ष में बाघ की मौत, रेस्क्यू के 9 दिन बाद तोड़ा दम

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पन्ना: आपसी संघर्ष में बाघ की मौत, रेस्क्यू के 9 दिन बाद तोड़ा दम


पन्ना, 05 मई (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व के अमानगंज बफर क्षेत्र में मंगलवार को एक बाघ का शव मिलने से वन विभाग में हड़कंप मच गया। प्रारंभिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सामने आया है कि बाघ की मौत किसी अन्य वन्यजीव के साथ हुए भीषण संघर्ष के कारण हुई।

जानकारी के अनुसार इसी बाघ को 26 अप्रैल को तारा ग्राम क्षेत्र से रेस्क्यू कर रेडियो कॉलर लगाकर कोर एरिया में छोड़ा गया था। रेस्क्यू के महज 9 दिन बाद ही उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। वन्यजीव चिकित्सकों की टीम ने बाघ के शरीर पर कई गहरे घावों के निशान पाए हैं। संघर्ष इतना गंभीर था कि उसकी रीढ़ और सिर की हड्डी भी टूटी हुई पाई गई। हालांकि बाघ के सभी अंग सुरक्षित मिले हैं, जिससे शिकार (पोचिंग) की आशंका से इंकार किया गया है। मौत के सटीक कारणों की पुष्टि के लिए विसरा सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

वन विभाग के अनुसार बाघ की लगातार निगरानी की जा रही थी। हाथियों और वनकर्मियों की टीम 24 घंटे उसकी गतिविधियों पर नजर रखे हुए थी, लेकिन इसके बावजूद वह संघर्ष में अपनी जान नहीं बचा सका।

घटना की सूचना मिलते ही राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के दिशा-निर्देशों के तहत क्षेत्र को सील कर डॉग स्क्वॉड से जांच कराई गई। इसके बाद वरिष्ठ अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी में बाघ का अंतिम संस्कार किया गया।

फिलहाल क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। कैमरा ट्रैप लगाए गए हैं और हाथियों के जरिए लगातार गश्त की जा रही है, ताकि इस तरह की घटनाओं पर नजर रखी जा सके।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे