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बांधवगढ़ में कॉलरयुक्त बाघिन का सफल रेस्क्यू, खराब रेडियो कॉलर हटाकर जंगल में छोड़ा

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बांधवगढ़ में कॉलरयुक्त बाघिन का सफल रेस्क्यू, खराब रेडियो कॉलर हटाकर जंगल में छोड़ा


उमरिया, 25 जुलाई (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के उमरिया जिले के विश्वप्रसिद्ध बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के धमोखर बफर क्षेत्र में शनिवार को वन विभाग ने कॉलरयुक्त मादा बाघिन का सफलतापूर्वक रेस्क्यू कर उसका खराब हो चुका रेडियो कॉलर हटा दिया। स्वास्थ्य परीक्षण के बाद बाघिन को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित छोड़ दिया गया।

बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक डॉ. अनुपम सहाय ने बताया कि पूर्व निर्धारित कार्ययोजना के तहत बाघिन को सुरक्षित तरीके से ट्रैंक्विलाइज (बेहोश) किया गया। इसके बाद उसका निष्क्रिय हो चुका रेडियो कॉलर हटाया गया और निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार स्वास्थ्य परीक्षण किया गया। पूरी तरह होश में आने के बाद बाघिन को उसके प्राकृतिक वन क्षेत्र में छोड़ दिया गया।

उन्होंने बताया कि बाघिन का रेडियो कॉलर लंबे समय से काम नहीं कर रहा था, जिसके कारण उसकी लोकेशन प्राप्त नहीं हो रही थी। इसके बाद वन विभाग ने प्रशिक्षित हाथियों, वन्यजीव विशेषज्ञों, वन अमले, ट्रैप कैमरों, वीएचएफ उपकरणों और अन्य तकनीकी संसाधनों की सहायता से व्यापक खोज अभियान चलाया। लगातार बारिश जैसी प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद करीब 100 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में निगरानी की गई।

वन विभाग के अनुसार 12 जुलाई को बाघिन को उसके होम रेंज में स्वस्थ अवस्था में चिन्हित किया गया था। इसके बाद प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) से अनुमति प्राप्त कर रेडियो कॉलर हटाने की कार्ययोजना तैयार की गई।

विभाग ने बताया कि पिछले दो दिनों से सघन सर्च अभियान चलाने के बाद शनिवार को धमोखर बफर के बरबसपुर बीट के पीएफ-126 क्षेत्र में रेस्क्यू और कॉलर हटाने की कार्रवाई सफलतापूर्वक पूरी की गई। अभियान में क्षेत्र संचालक, उप संचालक, सहायक संचालक, वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी, वन परिक्षेत्र अधिकारी सहित कुल 63 अधिकारी-कर्मचारी शामिल रहे। लक्ष्मण, सूर्या, रामा और श्याम नामक प्रशिक्षित हाथियों तथा उनके महावतों की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही।

स्वास्थ्य परीक्षण में बाघिन पूरी तरह स्वस्थ पाई गई। रेडियो कॉलर हटाने और बेहोशी का असर समाप्त होने के बाद उसे सुरक्षित रूप से जंगल में छोड़ दिया गया। वन विभाग के अनुसार बाघिन सामान्य रूप से अपने प्राकृतिक आवास की ओर चली गई, जिससे अभियान सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी