अनूपपुर: श्रीयंत्र मंदिर अमरकंटक 23 - 26 अक्टूबर को पूर्ण विधि - विधान के साथ होगी प्राण प्रतिष्ठा
अनूपपुर, 03 अक्टूबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के अमरकंटक में भारतीय प्राचीन उपासना पद्धति के प्रसिद्ध तांत्रिक शक्तिपीठ श्रीयंत्र मन्दिर को आकार लेने के बाद अब भगवती मां जगदम्बा की कृपा से इसकी प्राण प्रतिष्ठा के पुनीत महोत्सव मां नर्मदा की उद्गम नगरी अमरकंटक की पावन धरा पर विश्व प्रसिद्ध श्रीयंत्र महामेरु शक्तिपीठ के प्राण प्रतिष्ठा का आयोजन आगामी 23 से 26 अक्टूबर 2026 को होने जा रहा है। इसकी सम्पूर्ण तैयारियां हो चुकी हैं। मन्दिर परिसर और अमरकंटक नगर की सजावट का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
श्रीयंत्र महामेरु मन्दिर,सोनमूडा रोड, अमरकंटक मे आयोजित होने वाले इस ऐतिहासिक ,भव्य, दिव्य महोत्सव के आयोजक हरिद्वार के विख्यात संत एवं श्रीयंत्र मन्दिर - बटे कृष्ण आश्रम अमरकंटक के प्रमुख, महंत श्री शरद पुरी महाराज के मार्गदर्श में एवं समस्त शिष्यगण, भक्तगण एवं नगरवासी पूरी उर्जा ,उत्साह और तन्मयता के साथ महोत्सव की तैयारी कर रहे हैं। कार्यक्रम मे शामिल होने के लिये देश - विदेश से आने वाले हजारों संतों, आचार्यो, अतिथियों, श्रद्धालुओं , शिष्यमंडल की वृहद व्यवस्था की जा रही है।
स्वामी शरद पुरी जी महाराज ने बताया कि श्रीयंत्र मन्दिर का निर्माण , मन्दिर का कार्य प्रारंभ करने वाले के जीवन मे पूरा नहीं हो पाता। श्रीयंत्र मन्दिर अमरकंटक का निर्माण परमपूज्य विद्वान ब्रम्हलीन संत श्री श्री 1008 श्री अटल पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद जी महाराज के मार्गदर्शन और नेतृत्व मे लगभग तीन दशक पहले शुरु किया गया था।
स्वामी शरद पुरी जी महाराज ने बताया कि मैकल और विंध्य पर्वत के त्रिकोण अमरकंटक में अवस्थित श्रीयंत्र मंदिर समूचे संसार में श्री यंत्र महामेरु शक्तिपीठ के नाम से जाना जाता है। प्रसिद्ध तांत्रिक मंदिर कामाख्या की भव्यता को आलोकित करने वाला यह श्रीयंत्र महामेरु ज्योतिष विज्ञान का प्रसिद्ध देवशास्त्र भी है। जहां प्राकृतिक रहस्यों के साथ पृथ्वी एवं ग्रहों की गणना, गति एवं गणना क्रिया को समझा जा सकता है। मंदिर निर्माण का बीड़ा ब्रम्हलीन संत महामंडलेश्वर स्वामी शुकदेवानंद पुरी जी महाराज ने उठाया था। यह तांत्रिक शक्तिपीठ लगभग तीन दशक मे धीरे-धीरे अपना आकार ग्रहण कर पाया। मंदिर का आधार पद्मबंध, मध्य भाग त्रिकोणात्मक रचना तथा मंदिर का शीर्ष भाग देवबंध के स्वरूप में बनाया गया है। मंदिर के चारों कोनों में कालतत्व का अद्भुत एवं दर्शनीय अंकन किया गया है।
पृथ्वी एवं समस्त ग्रहों की गणना, गणना गति की क्रिया मंदिर के पांचवें धाम में उपलब्ध होगी
स्वामी शरद पुरी जी महाराज ने बताया कि अमरकंटक में स्थापित श्रीयंत्र महामेरु शक्तिपीठ में वास्तुशास्त्र, गणित, तंत्र विज्ञान, कला-कौशल और वेदांत की ऐसी साकार कल्पना की गई है, जिसे आने वाले समय में भी एक अद्भुत उदाहरण के रूप में देखा जाएगा। श्रीयंत्र मंदिर की गणना और इसकी संरचना अपने आप में विशिष्ट है। मंदिर के निर्माण में श्रीयंत्र के विभिन्न अंगों और ज्यामितीय संरचनाओं को वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक दृष्टि से समाहित किया गया है।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

