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डीजीपी कैलाश मकवाणा की मौजूदगी में नव आरक्षकों का दीक्षांत समारोह सम्पन्न

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डीजीपी कैलाश मकवाणा की मौजूदगी में नव आरक्षकों का दीक्षांत समारोह सम्पन्न


भोपाल, 14 मई (हि.स.)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल स्थित 25वीं वाहिनी, विशेष सशस्त्र बल में गुरुवार को नव आरक्षकों का दीक्षांत समारोह आयोजित किया गया। राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। समारोह में पुलिस महानिदेशक कैलाश मकवाणा ने मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होकर परेड की सलामी ली और निरीक्षण किया।

समारोह को संबोधित करते हुए डीजीपी कैलाश मकवाणा ने कहा कि मध्यप्रदेश पुलिस का गौरवशाली इतिहास रहा है और आरक्षक पुलिस संगठन की सबसे महत्वपूर्ण शक्ति होते हैं। लगभग 11 माह के कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण के बाद तैयार हुए ये नव आरक्षक भविष्य में पुलिस विभाग की कार्यक्षमता को और मजबूत करेंगे।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण अवधि जीवन का महत्वपूर्ण चरण होती है, जहां टीम भावना, अनुशासन, शारीरिक दक्षता और व्यवहारिक पुलिसिंग की सीख मिलती है। प्रशिक्षण के दौरान नव आरक्षकों को वेपन ट्रेनिंग, बलवा ड्रिल, कानून व्यवस्था, साइबर क्राइम, आधुनिक तकनीक और भीड़ नियंत्रण जैसे विषयों का प्रशिक्षण दिया गया।

डीजीपी ने कहा कि वर्तमान समय में साइबर अपराध, कानून व्यवस्था और आंतरिक सुरक्षा बड़ी चुनौतियां हैं, जिनसे निपटने के लिए पुलिस बल का तकनीकी रूप से दक्ष और शारीरिक रूप से सक्षम होना जरूरी है। उन्होंने विशेष सशस्त्र बल और मध्यप्रदेश पुलिस के जवानों द्वारा नक्सल विरोधी अभियान, दस्यु उन्मूलन, चुनाव ड्यूटी और अन्य संवेदनशील परिस्थितियों में किए गए कार्यों की सराहना की।

उन्होंने आगामी सिंहस्थ-2028 को मध्यप्रदेश पुलिस के लिए बड़ी चुनौती बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीक, ड्रोन सर्विलांस, सीसीटीवी मॉनिटरिंग और इंटीग्रेटेड कमांड सिस्टम भविष्य की पुलिसिंग का अहम हिस्सा होंगे।

कैलाश मकवाणा ने नव आरक्षकों को ईमानदारी, अनुशासन, संवेदनशीलता और संविधान के प्रति निष्ठा के साथ कार्य करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि वर्दी धारण करने के बाद पुलिसकर्मी का सबसे बड़ा दायित्व जनसेवा, कानून का पालन और राष्ट्रहित होता है।

समारोह के दौरान 25वीं वाहिनी, विसबल भोपाल के सेनानी नागेंद्र सिंह ने प्रशिक्षण प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण सत्र की शुरुआत 15 जून 2025 को हुई थी, जिसमें महिला एवं पुरुष नव आरक्षकों को आधुनिक पुलिसिंग, फायरिंग, रायट ड्रिल, कानून व्यवस्था और साइबर अपराध संबंधी प्रशिक्षण दिया गया।

उन्होंने बताया कि पहली बार प्रशिक्षण पाठ्यक्रम में साइबर क्राइम और सोशल मीडिया अपराधों को शामिल किया गया है, जिससे प्रशिक्षुओं को साइबर अपराधों से जुड़े आवश्यक पहलुओं की जानकारी दी गई।

समारोह में नव आरक्षकों ने साइलेंट ड्रिल और योग प्रदर्शन के माध्यम से अनुशासन, तालमेल और शारीरिक दक्षता का प्रदर्शन किया।

कार्यक्रम के अंत में डीजीपी कैलाश मकवाणा ने प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले नव आरक्षक देवेन्द्र कुमार गुप्ता (9वीं वाहिनी रीवा) को प्रथम तथा हर्षित कुशवाह (36वीं वाहिनी बालाघाट) को द्वितीय पुरस्कार और प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इसके अलावा इनडोर और आउटडोर प्रशिक्षण में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रशिक्षुओं को भी सम्मानित किया गया।

समारोह में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक चंचल शेखर, पुलिस महानिरीक्षक इरशाद वली, पुलिस आयुक्त संजय कुमार सहित अन्य पुलिस अधिकारी एवं कर्मचारी, विशेष सशस्त्र बल के अधिकारी, प्रशिक्षक एवं बड़ी संख्या में नव आरक्षकों के परिजन उपस्थित रहे।

हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा