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उज्जैन शहर में लूज मोशन,उल्टी, पेटदर्द और वायरल के मरीज बढ़े

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उज्जैन शहर में लूज मोशन,उल्टी, पेटदर्द और वायरल के मरीज बढ़े


उज्जैन, 18 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के उज्जैन शहर में लूज मोशन,उल्टी,पेटदर्द और वायरल बुखार के मरीज तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी खांसी हो रही है जिसमें केवल गले में दर्द ओर खीचाव रहता है। सूखी खांसी आती है और सीना भारी रहता है। दस से 15 दिन लग रहे हैं मरीजो को ठीक होने में। चरक अस्पताल,प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के अलावा निजी दवाखानों पर भी पीडि़त लोगों की भीड़ बनी हुई है।

एमडी मेडिसीन डॉ.जयवर्धन वर्मा के अनुसार मार्च से जुलाई तक तापमान में बढ़ोत्तरी होती है। वर्तमान में ग्लोबल वार्मिंग,देशों के बीच चल रहे युद्ध के कारण बारूदी जहरीले पर्यावरण के कारण जलवायु में तेजी से परिवर्तन हो रहा है। इससे तापमान में हो रही वृद्धि के कारण हमारे स्वास्थ्य पर मौसम का दुष्प्रभाव दिखाई दे रहा है। अधिक तापमान के कारण होने वाले स्वास्थ्य पर दूष्प्रभावों की रोकथाम एवं प्रभावी नियंत्रण के लिए समयानुसार उपाय आवश्यक है,ताकि बचाव हो सके।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ.राजीव संघवी के अनुसार तापमान में अचानक से परिवर्तन आया है। तेज गर्मी के कारण शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पास पहुँच रहा है। यह स्थिति एकाएक आ सकती है। समस्या जटिल होने पर किडनी काम करना बन्द कर सकती है। लू लगने पर अगर तुरंत उपचार न मिले तो मृत्यु भी हो सकती है। इसलिये पर्याप्त मात्रा में पानी अवश्य पिए। छोटे बच्चों को कपड़े से ढंककर छाया वाले स्थान पर रखें। गर्मियों में पसीना अधिक आने के कारण शरीर की त्वचा पर भी असर होता है। पसीना शरीर पर आता रहता है और जमता रहता है,जिसके कारण त्वचा पर कई बार खुजली होने लगती है और गर्मी से एलर्जी हो जाती है। चमड़ी लाल हो जाती है। कई बार ज्यादा खुजली करने के कारण बहुत लाल हो जाती है। शरीर की त्वचा पर घुमन सी होती है। अंचलों में इसे कांटेदार गर्मी भी कहा जाता है।

शासकीय चिकित्सक डॉ.जितेंद्र शर्मा के अनुसार हीट रेसेज के लक्षणोंपर ध्यान दें। इसमें शरीर पर छोटे गुलाबी या लाल रंग की त्वचा या फिर छोटे छोटे दाने निकल आते हैं। जलन, खुजली या त्वचा पर चुभन सी महसूस होती है। ऐसा तब होता है जब शरीर का पसीना आसानी से वाष्पित नहीं हो पाता है। ऐसा होने पर ठंडे पानी और कूलर की सहायता से शरीर का तापमान नियंत्रित करें। ढीले सूती कपड़े पहने। गर्मी के प्रभाव को कम करने के लिए विशेष प्रकार के सनस्क्रीन लोशन का प्रयोग करें। जितना संभव हो सके त्वचा को साफ और शुष्क बना कर रखें। ऐसा करने से संक्रमण की संभावना कम होती है। गर्मी में घर से बहार निकलते वक्त छाते का प्रयोग अवश्य करें। घर से बाहर जाते समय पानी या ठंडा शरबत पीकर ही बाहर निकले। जैसे केरी का पना और शिकंजी आदि। घर से बाहर जाते समय पीने का पानी साथ में लेकर जाए। तेज धूप में रहें तो एकदम से ठंडा पानी नहीं पीए।

सीएमएचओ डॉ.अशोक पटेल के अनुसार निर्जलीकरण की समस्या भी बहुत खतरनाक होती है। ऐसा गर्मी में शरीर में पानी की कमी हो जाती है। ऐसा तब होता है जब कोई काफी समय से काम में व्यस्त है या ज्यादा शरीरिक कार्य करता है और उसने काफी समय से पानी नहीं पीया है। ऐसा होने पर गर्मी में डीहाइड्रेशन की समस्या उत्पन्न हो जाती है। शरीर को निर्जलीकरण से बचाने के लिए नियमित रूप से थोड़े-थोड़े समय बाद पानी पीना आवश्यक है। अगर किसी का गला बार बार सूख रहा है,तो ये संकेत है कि उसके शरीर में पर्याप्त पानी नहीं है। यदि किसी दिन बहुत ज्यादा गर्मी है,उस दिन ज्यादा व्यायाम से बचें,क्योंकि इससे शरीर का पानी जल्दी सूखता है। सुबह जल्दी और देर शाम जब ठंडक हो तभी व्यायाम किया जाना चाहिए। निर्जलीकरण में ज्यादा पसीना आना, कमजोर या थका हुआ महसूस करना, शरीर का तापमान बढऩा, त्वचा का रंग पीला पडऩा या चेहरा पीला पढऩा, मितली-उल्टी जैसा महसूस करना, बेहोशी आना जैसे लक्षण होते हैं। ऐसा होने पर तुरंत इलेक्ट्रॉल/ओआरएस/फलों का रस लें। कॉर्बोनेटेड और कैफीन युक्त तरल पदार्थ से बचें।

चरक में ओपीडी पहुंची 1500 से उपरगर्मी की शुरूआत में ही लूज मोशन,उल्टी,वायरल बुखार,खांसी आदि से पीडि़त मरीजों की चरक अस्पताल में उपचार हेतु आवक तेजी से बढ़ी है। आरएमओ डॉ.चिंचोलीकर के अनुसार ओपीडी इन दिनों प्रतिदिन 1500 से उपर चली गई है। हालांकि सभी का उपचार होकर नि:शुल्क उपलब्ध दवाईयां दी जा रही है। शहरवासी सावधानी रखें ताकि बीमार होने से बच सकें।

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हिन्दुस्थान समाचार / ललित ज्‍वेल