पन्ना टाइगर रिजर्व में पहली बार राज्य स्तरीय वन्यजीव-केंद्रित सीएसआर कॉन्क्लेव का आयोजन
पन्ना, 08 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व मे पहली बार वन्यजीव पर केन्द्रित राज्य स्तरीय सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कॉन्क्लेव का दो दिवसीय आयोजन किया गया, जिसमें राज्य स्तरीय अधिकारियों के अलावा बडे औद्योगिक संस्थानों के प्रतिनिधियों सहित सामाजिक संस्था के प्रतिनिधि भी उपस्थित रहे।
पन्ना टाइगर रिजर्व के उपसंचालक धीरेंद्र पटेल ने रविवार को जानकारी देते हुए बताया कि पारिस्थितिक प्रबंधन के साथ औद्योगिक विकास को जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए मध्य प्रदेश वन विभाग और मध्य प्रदेश टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी ने राज्य के पहले वन्यजीव-केंद्रित कॉर्पाेरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी कॉन्क्लेव का सफलतापूर्वक समापन किया। पन्ना टाइगर रिजर्व के मनोरम परिदृश्य में आयोजित इस दो-दिवसीय कार्यक्रम ने भारत में संरक्षण वित्तपोषण के एक नए युग की शुरुआत की है।
ज्ञात हो कि यह कॉन्क्लेव मध्य प्रदेश के वन्यजीवों के संरक्षकों और कॉर्पोरेट जगत के नेताओं के बीच संवाद के लिए एक उच्च स्तरीय मंच के रूप में कार्य करता है। इसमें राज्य स्तरीय शीर्ष अधिकारियों मे संदीप यादव, प्रमुख सचिव (वन), मध्य प्रदेश, शुभ रंजन सेन, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख तथा मुख्य वन्यजीव अभिरक्षक, एल. कृष्णमूर्ति, एपीसीएफ (वन्यजीव), एच. एस. मोहंता, एपीसीएफ (भूमि प्रबंधन), उत्तम शर्मा, एपीसीएफ एवं क्षेत्र संचालक (चीता प्रोजेक्ट) के अलावा इस नेतृत्व के साथ राज्य के सभी टाइगर रिजर्व के क्षेत्र संचालक वन विहार राष्ट्रीय उद्यान, मुकुंदपुर चिड़ियाघर और गांधीसागर वन्यजीव अभयारण्य के निदेशक, नरेश यादव सीसीएफ छतरपुर वृत्त, बृजेंद्र कुमार श्रीवास्तव फील्ड डायरेक्टर पन्ना टाईगर भी शामिल हुए, जिससे राज्य की पारिस्थितिक जैव विविधता का व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित हुआ।
प्राकृतिक विरासत के प्रति कॉर्पाेरेट दिग्गजों की प्रतिबद्धताः- वन विभाग और टाइगर फाउंडेशन सोसाइटी द्वारा प्रस्तुत दूरदर्शी विचारों ने सीएसआर समर्थन जुटाने के लिए पूरी तरह से नए रास्ते खोल दिए हैं। भारत के प्रमुख सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के उद्यमों के सीएमडी, सीईओ और उच्च अधिकारियों की उत्साहजनक भागीदारी देखना बेहद सुखद रहा। प्रमुख प्रतिभागियों में शामिल थे। जिसमें कोल इंडिया, साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, वेस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड, हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड, ग्रीनको, और जियोमिन आयरन मैन्युफैक्चरिंग लिमिटेड आदि के अलावा इन्फ्रास्ट्रक्चर और पावर टाटा पावर, एलएंडटी, सुजलॉन, रवि इन्फ्रा बिल्ड प्रोजेक्ट्स लिमिटेड और नागार्जुन कंस्ट्रक्शन कंपनी, जे.के. सीमेंट, अल्ट्राटेक सीमेंट, बजरंग पावर एंड इस्पात लिमिटेड और ईकेआई एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड आदि शामिल रहे।
धरातल पर संरक्षण कार्यों का प्रत्यक्ष अनुभवः- वन्यजीव प्रबंधन की जमीनी हकीकत को समझने के लिए, प्रतिभागियों ने सफारी जिप्सी के माध्यम से क्षेत्र भ्रमण किया। प्रतिनिधियों ने पन्ना टाइगर रिजर्व के परिष्कृत प्रबंधन का अवलोकन किया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित पर ध्यान केंद्रित किया गया।वन सुरक्षा प्रतिनिधियों ने एंटी-पोचिंग (शिकार विरोधी) कैंपों का दौरा किया और वन कर्मचारियों द्वारा की जाने वाली 24/7 निगरानी प्रणालियों और पैदल गश्त को देखा। यह देखा गया कि कैसे स्थानीय समुदायों को संरक्षण और पर्यटन अर्थव्यवस्था के साथ जोड़ा गया है। इस दौरे का मुख्य आकर्षण बाघों का दर्शन रहा, जिसने राज्य के संरक्षण प्रयासों की सफलता की पुष्टि की। नेतृत्व ने कहा, यह पोर्टल पारदर्शिता और जुड़ाव की दिशा में एक दूरदर्शी कदम है। योगदान प्रक्रिया को डिजिटल बनाकर, हमने बाधाओं को दूर किया है, जिससे कॉर्पाेरेट जगत पूर्ण दक्षता और जवाबदेही के साथ हमारे वन्यजीवों के भविष्य में सक्रिय भागीदार बन सकता है। कॉन्क्लेव का समापन एक साझा संकल्प के साथ हुआ, देश की आर्थिक समृद्धि, इसके वन्य क्षेत्रों की पारिस्थितिक सुरक्षा के साथ कंधे से कंधा मिलाकर चलनी चाहिए।
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हिन्दुस्थान समाचार / सुरेश पांडे

