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अनूपपुर: जिलें भर में मनाया गया 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव, निकाली शोभायात्रा

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अनूपपुर: जिलें भर में मनाया गया 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव, निकाली शोभायात्रा


अनूपपुर: जिलें भर में मनाया गया 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव, निकाली शोभायात्रा


अनूपपुर: जिलें भर में मनाया गया 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव, निकाली शोभायात्रा


अनूपपुर: जिलें भर में मनाया गया 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव, निकाली शोभायात्रा


अनूपपुर: जिलें भर में मनाया गया 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर का जन्मोत्सव, निकाली शोभायात्रा


अनूपपुर, 30 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिला मुख्यालय सहित जिले के कोतमा, जैतहरी, अमरकंटक, चचाई, बिजुरी में जैन समाज के लोगो ने 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म जयंती में पूरे श्रद्धा हर्षोल्लास, परंपरागत व धार्मिक रीति रिवाज के सोमवार को धूमधाम से मनाते हुए हुए बैंड बाजों के साथ भगवान महावीर की झांकी में प्रतिमा को विराजमान करा गई शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान नगर भ्रमण में समाज के लोगों ने जगह-जगह आरती उतार कर पूजा अर्चना की।

अहिंसा के मार्ग पर चलकर सदा, दिया धर्म का उपदेश

अनूपपुर जिला मुख्याचलय में जैन मंदिर में समाज के लोगो ने 24वें तीर्थंकर भगवान महावीर स्वामी की जन्म जयंती पर श्री 1008 महावीर दिगंबर जैन मंदिर अनूपपुर में महावीर जयंती के पावन अवसर पर प्रातः 7:00 बजे भगवान महावीर का मस्तकाभिषेक, शांति धारा एवं विधी विधान से पूजा अर्चना कर देश व प्रदेश में खुशहाली की कामना की। इस दौरान बताया गया कि भगवान महावीर अहिंसा के मार्ग पर चलकर सदा, दिया धर्म का उपदेश,“अहिंसा परमोधर्म” का दिया, मानवता को शुभ सन्देश। “स्व से पहले संसार” यही था उनका परोपकार धर्म, दिया संसार को उन्होंने, मानव जीवन का सही मर्म। “बुराई को प्रेम से जीतो”, यही था उनके उपदेशों का सार,शत्रु और मित्र का न किया विचार, प्रेम भाव का दिया उपहार। उनके जीवन के तीन मंत्र, सम्यक विचार, सम्यक दर्शन और सम्यक चरित्र, इन्ही भावों से किया उन्होंने, धरा के कण-कण को पवित्र। पंच महाव्रत का अनुदान दिया, अमूल्य था उनका यह वरदान,सत्य, अहिंसा, अपरिग्रह, ब्रह्मचर्य और अस्तेय, इन्ही को दिया सम्मान। जीयो और जीने दो” था जिनका मुलमंत्र, उन महावीर को नमन, प्रेम, अहिंसा और सत्य के पुजारी थे।

कोतमा में शोभायात्रा में भजन कीर्तन करते हुए नगर के मुख्य मार्गो से भ्रमण में कराया

जैन धर्म के 24वें तीर्थंकर, अहिंसा के अवतार भगवान महावीर स्वामी का जन्मकल्याणक महोत्सव कोतमा नगर में अत्यंत हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया गया। इस अवसर पर सकल जैन समाज द्वारा गाजे-बाजे के साथ एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जिसमें पूरा नगर 'जियो और जीने दो' के जयघोष से गुंजायमान हो उठा। शोभायात्रा का मुख्य आकर्षण नन्हे-मुन्ने बच्चे रहे, जो रंग-बिरंगे पारंपरिक वस्त्रों में सजे हुए थे। बच्चों द्वारा दी गई मनमोहक प्रस्तुतियों से मन मोह लिया। शोभायात्रा में भगवान महावीर के जन्म उपरांत उन्हें पालने में झुलाने की जीवंत झांकी सजाई गई थी, जो श्रद्धालुओं के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र रही।

शोभायात्रा में भजनों की धुन पर झूमे श्रद्धालु जो नगर के मुख्य मार्गों से गुजरती इस शोभायात्रा में श्री जी का विमान (पालकी) साथ चल रहा था। युवा संगीतकारों ने एक से बढ़कर एक सुमधुर भजनों की प्रस्तुति दी।चंदन के पालना में झूले महावीरा, चम चम चमके गले को हार... और सारे के सारे भक्त मिलकर पुकारे, बड़े बाबा दिखा दो कमाल... जैसे भजनों पर युवा और महिलाएं झूमते नाचते नजर आए। इस दौरान तन-मन करते कौन खराब-अंडा, मछली, मांस, शराब और सत्य, अहिंसा, परोपकार जैसे नारों के माध्यम से समाज को व्यसन मुक्ति और मानवता का संदेश दिया गया।

जगह-जगह हुई श्री जी की आरती

नगरवासियों ने भगवान के स्वागत में अपने घरों के सामने सुंदर रंगोलियां सजाईं। जैसे ही श्री जी का विमान द्वार पर पहुंचा, श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से आरती और श्रीफल का थाल सजाकर पूजन किया और मंगल आशीर्वाद प्राप्त किया। शोभायात्रा नगर भ्रमण के पश्चात पुनः मंदिर पहुंची, जहां विधि-विधान से कार्यक्रम का समापन हुआ। मंदिर जी में भगवान की प्रतिमा का अभिषेक और विश्व शांति की मंगल कामना के साथ शांतिधारा करने का परम सौभाग्य अंगूरी बाई जैन, पवन कुमार, राजेश कुमार एवं सुभाष कुमार जैन परिवार को प्राप्त हुआ।

अमरकंटक में भगवान महावीर स्वामी की जयंती श्रद्धा व उल्लास के साथ मनाई गई

पवित्र नगरी अमरकंटक स्थित दिगंबर जैन सर्वोदय तीर्थ क्षेत्र में आज परम पूज्य भगवान महावीर स्वामी की जयंती अत्यंत श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक गरिमा के साथ संपन्न हुई। मंदिर परिसर प्रातःकाल से ही भक्तिमय वातावरण, मंत्रोच्चार और जयघोष से गुंजायमान रहा। इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी का विशेष अभिषेक, पूजन, अर्चन एवं आरती विधि-विधानपूर्वक संपन्न हुई। श्रद्धालुओं ने भक्ति भाव से प्रभु के चरणों में नमन कर आत्मशुद्धि एवं कल्याण की कामना की। संध्याकाल में भक्तांबर विधान एवं भव्य महा आरती का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु सम्मिलित हुए।

इसके पूर्व मंदिर परिसर से एक भव्य शोभायात्रा निकाली गई, जो ध्वज, गाजे-बाजे एवं धार्मिक प्रतीकों के साथ नगर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरी। जिसमे जैन समाज के लोगों ने धर्म, अहिंसा और सदाचार के जयघोष कर वातावरण को आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण रहा। समापन पर मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं के बीच प्रसाद का वितरण किया गया। इस अवसर पर भगवान महावीर स्वामी के जीवन संदेशों का भी स्मरण किया गया। जहां बताया गया कि उनके उपदेश आज भी मानव जीवन के लिए मार्गदर्शक हैं। “अहिंसा परमो धर्मः” के माध्यम से उन्होंने मन, वचन और कर्म से किसी भी जीव को पीड़ा न पहुँचाने की प्रेरणा दी। साथ ही सत्य और अपरिग्रह का पालन करते हुए सीमित संसाधनों में संतोषपूर्ण जीवन जीने का संदेश दिया। इसके अतिरिक्त जीव दया और करुणा का भाव रखते हुए प्रत्येक प्राणी में आत्मा का वास मानकर सभी के प्रति समान दृष्टि रखने की सीख दी। महावीर स्वामी के ये सिद्धांत आज के युग में भी सामाजिक सद्भाव, शांति और नैतिक जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं। उनकी जयंती का यह पर्व समाज में धर्म, संयम और मानवीय मूल्यों को सुदृढ़ करने का संदेश देता है।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला