अनूपपुर: 1300 वर्ष प्राचीन मुरली मनोहर मंदिर, जहां राधा-रुक्मणी संग विराजते हैं श्रीकृष्ण
अनूपपुर, 03 सितंबर (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले की धार्मिक नगरी अमरकंटक में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का पर्व इस बार भी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जाएगा। मां नर्मदा मंदिर परिसर में स्थित प्राचीन मुरली मनोहर मंदिर में जन्माष्टमी के अवसर पर विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा। करीब 1300वर्ष पुराने इस मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व बड़े ही उत्साह के साथ मनाया जाता है। मां नर्मदा मंदिर में पूजा अर्चना करने के लिए पहुंचने वाले श्रद्धालु इस मंदिर के दर्शन किए बगैर भी नहीं लौटते हैं।
मां नर्मदा मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित धनेश द्विवेदी वंदे महाराज ने बताया कि मुरली मनोहर मंदिर अपनी अनूठी धार्मिक मान्यता के कारण श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र है। मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण के साथ राधाजी और रुक्मणीजी एक साथ विराजमान हैं। श्रीकृष्ण के साथ दोनों देवियों के एक साथ विराजित होने की परंपरा ही इस मंदिर को विशिष्ट बनाती है। इसके साथ ही मंदिर के मुख्य प्रवेश द्वार पर भगवान विष्णु के वाहक गरुण देवता भी विराजमान है।
जन्माष्टमी से पहले शुरू होगा पूजन
प्रधान पुजारी ने बताया कि जन्माष्टमी के अवसर पर मंदिर की आकर्षक साज-सज्जा की जाएगी। भगवान को भोग-प्रसाद अर्पित करने के साथ रामायण और सुखसागर पाठ का आयोजन होगा। जन्माष्टमी से कुछ घंटे पूर्व ही विशेष पूजन-अर्चन शुरू हो जाएगा। शाम होते ही बड़ी संख्या में महिलाएं मंदिर पहुंचकर भजन-कीर्तन करेंगी और भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति में लीन रहेंगी। जन्माष्टमी के बाद भगवान का षोडशोपचार पूजन किया जाएगा। इस दौरान मंदिर परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहेगा और श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव में शामिल होंगे।
बच्चों की मटकी फोड़ प्रतियोगिता भी होगी
धार्मिक आयोजनों के साथ जन्माष्टमी पर बच्चों के लिए मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन भी किया जाएगा। बच्चे उत्साह के साथ मटकी फोड़ने का प्रयास करेंगे। इससे मंदिर परिसर में धार्मिक आस्था के साथ उत्सव और उमंग का माहौल भी देखने को मिलेगा।
अमरकंटक की धार्मिक पहचान में प्राचीन मुरली मनोहर मंदिर का अपना विशेष स्थान है। जन्माष्टमी के अवसर पर जैसे ही रात्रि प्रारंभ होगी वैसे ही यहां श्रद्धालुओं का आना शुरू हो जाता है। देश विदेश से आने वाले पर्यटक और श्रद्धालु भी इस अवसर पर यहां पहुंचकर जन्माष्टमी का पर्व श्रद्धा भाव के साथ मनाते हैं।
हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला

