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अनूपपुर: छात्रों ने जनजातीय विश्वविद्यालय के वार्डन पर धर्मांतरण का लगाया आरोप, छोड़ा कैंपस

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अनूपपुर: छात्रों ने जनजातीय विश्वविद्यालय के वार्डन पर धर्मांतरण का लगाया आरोप, छोड़ा कैंपस


अनूपपुर, 21 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले में स्थापित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक में नए विवाद के कारण चर्चा में है। विश्वविद्यालय के सोन रिसर्च हॉस्टल से जुड़े कुछ छात्रों और सामाजिक संगठनों ने आरोप लगाया है कि परिसर में कथित रूप से धर्मांतरण के प्रयास किए जा रहे हैं, जिसके कारण कुछ शोधार्थियों को अपना एडमिशन रद्द कर विश्वविद्यालय छोड़ना पड़ा।

शोधार्थी छात्र जय दीक्षित ने शनिवार को हॉस्टल के प्रशासनिक वार्डन डॉ. चार्ल्स वर्गीज़ पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने कुछ छात्रों को ईसाई धर्म स्वीकार करने और जीसस के मार्ग का अनुसरण करने के लिए प्रेरित किया हैं। छात्रों का दावा है कि उन्हें यह संकेत दिया गया कि यदि वे ऐसा करते हैं तो हॉस्टल आवंटन और अन्य सुविधाओं में उनके प्रति अनुकूल रवैया अपनाया जा सकता है। इस कथित दबाव और विवादित परिस्थितियों के कारण कुछ शोधार्थियों ने अत्यधिक मानसिक तनाव में आकर विश्वविद्यालय में अपना प्रवेश निरस्त करवा लिया और अपने गृह राज्य बिहार लौट गए।

इस घटना के बाद विश्वविद्यालय परिसर में असंतोष और चिंता का माहौल बना हुआ है। कुछ सामाजिक संगठनों ने डॉ. चार्ल्स वर्गीज़ के कथित रूप से कुछ विवादित संगठनों से संबंध होने की आशंका व्यक्त की जा रही है। संगठनों का कहना है कि इस मामले में पीएफआई (पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया) से संभावित संबंधों की भी जांच की जानी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।

शोधार्थी छात्र जय दीक्षित ने यह भी आरोप लगाया है कि डॉ. वर्गीज ने पूर्व में छात्रों के साथ बातचीत के दौरान कुछ विवादित टिप्पणियाँ की थीं। छात्रों का कहना है कि एक अवसर पर उन्होंने यह कथन किया कि कीड़े खाने में अधिक प्रोटीन होता है, जिससे कई छात्रों में असहजता और आक्रोश की स्थिति पैदा हुई। सामाजिक संगठनों का कहना है कि जनजातीय समाज के शैक्षणिक और सांस्कृतिक उत्थान के उद्देश्य से स्थापित इस केंद्रीय विश्वविद्यालय में यदि इस प्रकार के आरोप सामने आते हैं तो यह अत्यंत गंभीर विषय है। उनका मानना है कि यदि किसी छात्र पर किसी भी प्रकार का धार्मिक दबाव या प्रलोभन डाला गया है तो यह संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता और समानता के सिद्धांतों के भी विपरीत है।

छात्रों और सामाजिक संगठनों ने विश्वविद्यालय प्रशासन, शिक्षा मंत्रालय तथा संबंधित जांच एजेंसियों से मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

हिन्दुस्थान समाचार / राजेश शुक्ला