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आरटीआई मामले में राज्य सूचना आयोग सख्त, उमरिया के जिला प्रबंधक व संभागीय प्रबंधक को किया तलब

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आरटीआई मामले में राज्य सूचना आयोग सख्त, उमरिया के जिला प्रबंधक व संभागीय प्रबंधक को किया तलब


उमरिया, 8 जुलाई (हि.स.)। सूचना का अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत मांगी गई जानकारी उपलब्ध नहीं कराने और आयोग के समक्ष उपस्थित नहीं होने के मामले में मध्यप्रदेश राज्य सूचना आयोग ने सख्त रुख अपनाया है। आयोग ने मध्य प्रदेश स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन के उमरिया जिला प्रबंधक रोहित सिंह बघेल को व्यक्तिगत रूप से 22 जुलाई 2026 को आयोग के समक्ष उपस्थित होने का अंतिम अवसर दिया है। साथ ही उमरिया कलेक्टर को उनकी उपस्थिति सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए हैं। आयोग ने संभागीय स्तर पर भी प्रकरण में जवाबदेही तय करने के निर्देश जारी किए हैं।

मामला कटनी जिले के कैमोर-खलवारा निवासी गणेश राव द्वारा दायर आरटीआई आवेदन से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि 28 मार्च 2024 को सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 6(1) के तहत उमरिया जिले की राइस मिलों के वर्ष 2017 से अब तक किए गए निरीक्षणों की रिपोर्ट और संबंधित दस्तावेजों की प्रमाणित प्रतियां मांगी थीं, लेकिन निर्धारित अवधि बीतने के बाद भी जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।

आवेदक के अनुसार, इसके बाद उन्होंने संभागीय प्रबंधक, नागरिक आपूर्ति निगम, रीवा के समक्ष प्रथम अपील दायर की, लेकिन वहां से भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने राज्य सूचना आयोग में द्वितीय अपील प्रस्तुत की।

आयोग में 20 मई 2026 को हुई सुनवाई के दौरान अपीलकर्ता की ओर से प्रतिनिधि राहुल चांदवानी उपस्थित हुए, जबकि लोक सूचना अधिकारी एवं जिला प्रबंधक रोहित सिंह बघेल न तो स्वयं उपस्थित हुए और न ही आयोग के समक्ष कोई लिखित पक्ष रखा।

अपने आदेश में आयोग ने कहा कि लोक सूचना अधिकारी द्वारा आयोग के आदेशों की लगातार अवहेलना गंभीर विषय है। आयोग ने माना कि अपीलकर्ता को सूचना उपलब्ध नहीं कराई गई तथा आयोग के निर्देशों का पालन भी नहीं किया गया। इस पर आयोग ने अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए रोहित सिंह बघेल से सुनवाई में अनुपस्थित रहने का स्पष्टीकरण भी मांगा है।

आयोग ने आदेश में कहा है कि सूचना का अधिकार अधिनियम की धारा 19(7) के तहत आयोग के आदेश संबंधित लोक प्राधिकारी पर बाध्यकारी हैं। इसलिए जिला प्रबंधक को 22 जुलाई 2026 को भोपाल स्थित राज्य सूचना आयोग में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर अपना पक्ष रखने तथा पालन प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। इसके साथ ही उमरिया कलेक्टर को आदेश की तामील कराकर उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कहा गया है।

आवेदक ने यह भी आरोप लगाया है कि जिन अभिलेखों की जानकारी मांगी गई है, वे जिले में धान एवं चावल खरीदी से जुड़ी कथित अनियमितताओं से संबंधित हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और मामले की जांच एवं आयोग की आगामी सुनवाई के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

हिन्दुस्थान समाचार / सुरेन्‍द्र त्रिपाठी