इंदौर : सोयाबीन से बने टोफू, कुकीज और नमकीन अब एक ही काउंटर पर मिलेंगे
इंदौर, 15 अक्टूबर (हि.स.)। सोयाबीन से तैयार विभिन्न खाद्य पदार्थ अब एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगे। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान, इंदौर ने सोयाबीन के खाद्य उपयोगों को बढ़ावा देने के लिए अपने खंडवा रोड स्थित परिसर में ‘सोया आद्या’ नाम से काउंटर शुरू किया है। संस्थान के मुख्य द्वार के समीप स्थापित इस काउंटर का उद्घाटन गुरुवार को संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों की मौजूदगी में किया।
इस काउंटर पर सोया पनीर यानी टोफू, सोयाबीन कुकीज, सोया आटे से बनी मठरी, नमकीन और बिस्किट सहित विभिन्न खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराए जा रहे हैं। इसके अलावा सोयाबीन के प्रसंस्करण से प्राप्त ओकारा यानी सोया पल्प से बने खाद्य उत्पाद भी यहां मिलेंगे। संस्थान की इस पहल का उद्देश्य लोगों को सोयाबीन से तैयार होने वाले विभिन्न खाद्य पदार्थों से परिचित कराना और इसे रोजमर्रा के भोजन में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
नकदी फसल से आगे खाद्य उपयोग पर जोर
सोयाबीन को आमतौर पर प्रमुख व्यावसायिक फसल के रूप में देखा जाता है, लेकिन इससे कई तरह के खाद्य पदार्थ भी तैयार किए जा सकते हैं। प्रोटीन के साथ इसमें आयरन, कैल्शियम, विभिन्न विटामिन और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं। ऐसे में सोया आधारित खाद्य उत्पादों की उपलब्धता बढ़ाने को पोषण सुरक्षा की दिशा में महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
संस्थान के निदेशक डॉ. के.एच. सिंह ने कहा कि सोयाबीन में खाद्य एवं पोषण सुरक्षा की दृष्टि से व्यापक संभावनाएं हैं। जरूरत इस बात की है कि इसके विभिन्न खाद्य उपयोगों को प्रोत्साहित किया जाए और इसे आम लोगों के दैनिक आहार का हिस्सा बनाया जाए।
उन्होंने कहा कि सोयाबीन से विविध खाद्य पदार्थ तैयार कर उन्हें उपभोक्ताओं तक पहुंचाने से घरेलू बाजार में इसकी मांग बढ़ाने में मदद मिल सकती है। इससे किसानों के लिए बाजार के नए अवसर विकसित होने और सोयाबीन के मूल्य में स्थिरता लाने की संभावनाएं भी मजबूत हो सकती हैं।
वैज्ञानिकों के प्रयासों से विकसित हुए खाद्य उत्पाद
संस्थान के कृषि व्यवसाय इन्क्यूबेशन केंद्र के माध्यम से सोयाबीन आधारित खाद्य उत्पादों के विकास और उनकी निर्माण विधियों को मानकीकृत करने का काम किया जा रहा है। इस दिशा में खाद्य प्रौद्योगिकी विशेषज्ञ डॉ. नेहा पांडे का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
डॉ. नेहा पांडे ने कई वर्षों के प्रयोगों और उत्पाद विकास के जरिए विभिन्न सोया आधारित खाद्य पदार्थों की निर्माण विधियों को मानकीकृत करने में योगदान दिया है। उत्पादों के विकास के दौरान उपभोक्ताओं की पसंद और उनकी खाद्य आदतों को भी ध्यान में रखा गया है, ताकि सोयाबीन से बने पदार्थों को आम लोगों के बीच लोकप्रिय बनाया जा सके।
युवा उद्यमियों को प्रशिक्षण, उत्पादों की बिक्री का भी अवसर
कृषि व्यवसाय इन्क्यूबेशन केंद्र के प्रभारी डॉ. एम.पी. शर्मा ने बताया कि केंद्र खाद्य प्रसंस्करण और सोया आधारित उत्पाद निर्माण के क्षेत्र में नए उद्यमियों तथा युवाओं को प्रशिक्षण दे रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त उद्यमियों द्वारा विकसित खाद्य उत्पादों को भी आने वाले समय में ‘सोया आद्या’ काउंटर के माध्यम से उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का प्रयास किया जाएगा।
इससे खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में उद्यमिता को बढ़ावा मिलने के साथ सोयाबीन का मूल्य संवर्धन करने के अवसर भी बढ़ सकते हैं। स्थानीय स्तर पर उत्पाद तैयार करने वाले उद्यमियों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए एक माध्यम उपलब्ध कराने की दिशा में भी यह पहल उपयोगी साबित हो सकती है।
खेत से रसोई तक सोयाबीन पहुंचाने की पहल
‘सोया आद्या’ काउंटर की स्थापना का उद्देश्य सोयाबीन के उपयोग को खेत से रसोई तक पहुंचाना और इसके पोषण के साथ व्यावसायिक महत्व को बढ़ावा देना है। संस्थान को उम्मीद है कि इस पहल से इंदौर और आसपास के क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को सोया आधारित खाद्य पदार्थों को जानने, चखने और खरीदने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही सोयाबीन के घरेलू उपयोग के प्रति जागरूकता बढ़ाने, उत्पादों के विपणन को विस्तार देने और किसानों के लिए बाजार की संभावनाएं विकसित करने में भी मदद मिल सकती है।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

