दतियाः नौ साल से लोकार्पण की बाट जोह रही मृदा परीक्षण प्रयोगशाला, भवन में पड़ने लगीं दरारें
भांडेर, 3 सितंबर (हि.स.)। किसानों को मिट्टी की उर्वरा शक्ति की सही जानकारी उपलब्ध कराने और खेती को लाभकारी बनाने के उद्देश्य से मध्य प्रदेश के दतिया जिले के भांडेर के सरसई रोड पर करीब 36 लाख रुपये की लागत से बनाई गई मृदा परीक्षण प्रयोगशाला नौ साल बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। मई 2017 में भवन का निर्माण पूरा होने के बावजूद प्रयोगशाला का लोकार्पण नहीं हुआ। लंबे समय से बंद पड़े भवन की दीवारों में अब दरारें पड़ने लगी हैं।
प्रयोगशाला शुरू नहीं होने का सीधा असर आसपास के किसानों पर पड़ रहा है। भांडेर क्षेत्र के करीब 41 गांवों के किसानों की सुविधा के लिए इसका निर्माण कराया गया था, ताकि उन्हें मिट्टी की जांच के लिए दूर न जाना पड़े। वर्तमान में जिन किसानों को मिट्टी परीक्षण की आवश्यकता होती है, उन्हें इसके लिए दतिया जाना पड़ता है। दूरी और परेशानी के कारण अधिकांश किसान मिट्टी की जांच कराने से ही बचते हैं।
बता दें कि खेती में मिट्टी की उर्वरा शक्ति का महत्वपूर्ण स्थान है। लगातार रासायनिक खादों के इस्तेमाल से मिट्टी में मौजूद पोषक तत्वों का संतुलन प्रभावित हो सकता है। ऐसे में मिट्टी के नमूने की जांच कर उसमें मौजूद रासायनिक तत्वों और पोषक तत्वों की स्थिति का पता लगाया जाता है। रिपोर्ट के आधार पर किसान अपनी फसल के लिए आवश्यक खाद और उसकी मात्रा तय कर सकते हैं।
इसी उद्देश्य से सरसई में मृदा परीक्षण प्रयोगशाला स्थापित की गई थी। इसके शुरू होने से भांडेर के आसपास के 41 गांवों के किसानों को स्थानीय स्तर पर मिट्टी की जांच की सुविधा मिलनी थी, लेकिन नौ वर्ष गुजरने के बाद भी इसका लाभ किसानों को नहीं मिल पा रहा है।
प्रयोगशाला के अभाव में क्षेत्र के अधिकांश किसान मिट्टी परीक्षण नहीं करा रहे हैं। कुछ किसान जिन्हें इसकी अधिक जरूरत महसूस होती है, वे मिट्टी की जांच के लिए दतिया का रुख करते हैं। इससे किसानों को अतिरिक्त समय और खर्च उठाना पड़ता है।
मई 2017 में निर्माण पूरा होने के बाद भी प्रयोगशाला चालू नहीं हो सकी। करीब नौ वर्ष से उपयोग के इंतजार में खड़ा भवन अब रखरखाव के अभाव में खराब होने लगा है। भवन की दीवारों पर दरारें दिखाई देने लगी हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जिस सुविधा के लिए लाखों रुपये खर्च किए गए, वह किसानों के उपयोग में आने से पहले ही जर्जर क्यों होने लगी।
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हिन्दुस्थान समाचार / राजू विश्वकर्मा

