दमोह:डेंगू-मलेरिया के बढ़ते मामलों से बढ़ी चिंता, रोकथाम उपायों की रफ्तार पर उठे सवाल
दमोह, 30 मार्च (हि.स.)। मध्य प्रदेश के दमोह जिले में डेंगू और मलेरिया के बढ़ते मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्था और स्थानीय प्रशासन की तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। पिछले कुछ वर्षों में संक्रमण के आंकड़ों में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है, जिससे नागरिकों के बीच चिंता और भय का माहौल बनता जा रहा है। लोगों का कहना है कि रोकथाम के प्रयास अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पा रहे हैं, जिसके कारण स्थिति धीरे-धीरे नियंत्रण से बाहर होती दिख रही है।
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो वर्ष 2022 में डेंगू के 71 मामले सामने आए थे, जो वर्ष 2023 में बढ़कर 216 हो गए। वहीं, वर्ष 2024 में यह संख्या 230 तक पहुंच गई। लगातार बढ़ते ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि मौजूदा रोकथाम रणनीतियां पर्याप्त प्रभावी नहीं हैं। वर्ष 2025-26 के लिए भी विशेषज्ञों ने पहले से ही सतर्कता बरतने की सलाह दी है, ताकि संक्रमण के प्रसार को समय रहते रोका जा सके।
उल्लेखनीय है कि शहर के कई वार्डों में जलभराव, गंदगी और मच्छरों की बढ़ती संख्या ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। नालियों की नियमित सफाई नहीं होने, खाली प्लॉटों में पानी जमा रहने और निर्माणाधीन क्षेत्रों में लंबे समय तक पानी ठहरने से मच्छरों का प्रजनन तेजी से बढ़ रहा है। नागरिकों का आरोप है कि फॉगिंग अभियान अनियमित है और एंटी-लार्वा छिड़काव भी सीमित इलाकों तक ही सिमटकर रह गया है।
घनी बस्तियों, अंदरूनी गलियों और तालाब किनारे बसे इलाकों में समस्या अधिक गंभीर है। यहां कचरे के ढेर, बंद नालियां और गंदगी मच्छरों के पनपने के लिए अनुकूल वातावरण तैयार कर रहे हैं। शाम होते ही मच्छरों का प्रकोप बढ़ जाता है, जिससे लोगों का घरों से बाहर निकलना तक मुश्किल हो जाता है। कई नागरिकों ने यह भी शिकायत की है कि शिकायत दर्ज कराने के बावजूद कार्रवाई में देरी होती है, जिससे समस्या लंबे समय तक बनी रहती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि इस स्थिति से निपटने के लिए केवल औपचारिक उपाय पर्याप्त नहीं हैं। नियमित लार्वा सर्वे, घर-घर जांच, हाई-रिस्क क्षेत्रों की पहचान और समय पर इलाज बेहद जरूरी है। यदि जलभराव वाले स्थानों को तुरंत खत्म किया जाए और संदिग्ध मरीजों की समय पर जांच की जाए, तो संक्रमण को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
इधर, जिले में बुखार से पीड़ित कुछ मरीजों की मौत की खबरों ने भी लोगों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि इन मामलों में डेंगू या मलेरिया की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, फिर भी इन घटनाओं ने स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता पर सवाल खड़े किए हैं। विभाग की ओर से निगरानी बढ़ाने और जांच प्रक्रिया को तेज करने की बात कही जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार डेंगू में प्लेटलेट्स तेजी से गिर सकते हैं, जबकि मलेरिया में तेज बुखार, ठंड लगना और कमजोरी जैसे लक्षण सामने आते हैं। बच्चों, बुजुर्गों और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है।
प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने दें, कूलर और पानी की टंकियों की नियमित सफाई करें तथा बुखार के लक्षण दिखने पर तुरंत जांच कराएं। वर्तमान स्थिति को देखते हुए साफ है कि यदि समय रहते ठोस और प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले समय में यह समस्या और गंभीर रूप ले सकती है।
---------------
हिन्दुस्थान समाचार / हंसा वैष्णव

