सतना एसएनसीयू में तीन माह का डेथ रेशियो 11.33 प्रतिशत, तय मानक से अधिक; 87 नवजातों की मौत
सतना, 09 जुलाई (हि.स.)। मध्य प्रदेश के सतना जिला अस्पताल की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (एसएनसीयू) में भर्ती नवजातों की मृत्यु दर निर्धारित राज्य मानक से अधिक दर्ज की गई है। वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल से जून) में एसएनसीयू में भर्ती 773 गंभीर नवजातों में से 87 की मौत हो गई। इस अवधि में डेथ रेशियो 11.33 प्रतिशत रहा, जबकि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं संचालनालय ने इसे 10 प्रतिशत से कम रखने के निर्देश दिए हैं।
आंकड़ों के अनुसार एसएनसीयू में 20 बिस्तरों की व्यवस्था है। इनमें 10 बेड इनबॉर्न यूनिट के लिए हैं, जहां जिला अस्पताल में जन्म लेने वाले गंभीर नवजातों को भर्ती किया जाता है, जबकि 10 बेड आउटबॉर्न यूनिट के लिए हैं, जहां अन्य स्वास्थ्य संस्थानों से रेफर होकर आने वाले नवजातों का उपचार किया जाता है। विभागीय जानकारी के मुताबिक भर्ती होने वाले 60 प्रतिशत से अधिक मामले रेफरल श्रेणी के हैं।
एसएनसीयू के रिकॉर्ड के अनुसार अप्रैल से जून के बीच भर्ती नवजातों में एंटीबायोटिक दवाओं का उपयोग 41 प्रतिशत मामलों में किया गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में कम है। गत वर्ष यह आंकड़ा 50 प्रतिशत से अधिक था। राज्य स्तर पर एंटीबायोटिक उपयोग की सीमा 60 प्रतिशत से कम रखने का मानक निर्धारित किया गया है।
इसी अवधि में 40 गंभीर नवजातों को बेहतर उपचार के लिए रीवा और जबलपुर के उच्च चिकित्सा संस्थानों में रेफर किया गया। वहीं 10 मामलों में परिजनों ने उपचार से असंतुष्ट होकर 'लामा' (लीव अगेंस्ट मेडिकल एडवाइस) प्रक्रिया के तहत शिशुओं को अपनी जिम्मेदारी पर अस्पताल से छुट्टी दिला दी।
एसएनसीयू में वर्तमान में तीन वेंटिलेटर और तीन सीपैप (सीपीएपी) मशीनें उपलब्ध हैं, जिनके माध्यम से गंभीर नवजातों का उपचार किया जा रहा है।
सिविल सर्जन डॉ. अमर सिंह ने बताया कि चार दिन पहले एसएनसीयू की समीक्षा बैठक में नवजात मृत्यु दर कम करने के लिए चिकित्सकों और संबंधित स्टाफ को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि एसएनसीयू में अधिकांश ऐसे नवजात भर्ती होते हैं जिनकी स्थिति अत्यंत गंभीर होती है। चिकित्सकीय टीम उन्हें बचाने के लिए हरसंभव प्रयास करती है।
हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्द्र द्विवेदी

