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चित्रकूट में मंदाकिनी पर दीपदान कर कामतानाथ के दरबार में मुख्यमंत्री ने नवाया शीश

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चित्रकूट में मंदाकिनी पर दीपदान कर कामतानाथ के दरबार में मुख्यमंत्री ने नवाया शीश


सतना, 07 नवंबर (हि.स.)। दीपावली मेले के आध्यात्मिक माहौल के बीच मध्‍य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव शनिवार को धर्मनगरी चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने पवित्र मंदाकिनी नदी में दीपदान किया और भगवान श्रीकामतानाथ के दरबार में पहुंचकर दर्शन-पूजन कर शीश नवाया। मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान उन्होंने बच्चों से मुलाकात कर उन्हें उपहार भी भेंट किए।

मुख्यमंत्री शनिवार अपराह्न करीब तीन बजे हेलीकॉप्टर से चित्रकूट पहुंचे। हेलीपैड पर राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी, सांसद गणेश सिंह, विधायक सुरेंद्र सिंह गहरवार, दीनदयाल शोध संस्थान के सचिव अभय महाजन, भाजपा जिलाध्यक्ष पंडित भगवती पांडेय, नगर पंचायत अध्यक्ष साधना पटेल, प्रबल श्रीवास्तव और कार्तिकेय द्विवेदी सहित भाजपा नेताओं एवं कार्यकर्ताओं तथा प्रशासनिक अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

चित्रकूट पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री ने सबसे पहले मंदाकिनी नदी में दीपदान किया। इसके बाद भगवान श्रीकामतानाथ के मंदिर पहुंचकर दर्शन-पूजन किया। दीपावली मेले के दौरान मुख्यमंत्री का यह धार्मिक प्रवास श्रद्धालुओं के बीच चर्चा का विषय रहा।

बच्चों को उपहार देकर बढ़ाया उत्साह

मुख्यमंत्री अपने प्रवास के दौरान वहां मौजूद बच्चों के बीच भी पहुंचे। उन्होंने बच्चों से बातचीत कर उनका हालचाल जाना और उन्हें उपहार भेंट किए। मुख्यमंत्री से मिलकर बच्चे उत्साहित नजर आए। उपहार पाकर उनके चेहरे खिल उठे।

दीपावली मेले में आकर्षण बना श्रीराम संस्कृति वन

चित्रकूट के दीपावली मेले में इस बार श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए श्रीराम संस्कृति वन भी नया आकर्षण बना हुआ है। वन विभाग द्वारा विकसित इस परिसर को मेले के दौरान लोगों के लिए खोल दिया गया है। कामतानाथ दर्शन, कामदगिरि परिक्रमा और मंदाकिनी के रामघाट पहुंचने वाले श्रद्धालु अब यहां प्रकृति, हरियाली और रामायणकालीन सांस्कृतिक प्रतीकों का भी अवलोकन कर रहे हैं।

परिसर में श्रीराम वन की आकृति, विभिन्न डिजाइन की वाटिकाएं, पौधों से तैयार धार्मिक प्रतीक, आकर्षक प्रवेश द्वार, पैदल भ्रमण के लिए पाथवे, जलाशय, गजीबो और विश्राम स्थल विकसित किए गए हैं। यहां तालाबों और हरित क्षेत्रों का भी विकास किया गया है। कामदगिरि पर्वत की आकृति और रामायणकालीन संस्कृति से जुड़े प्रतीक इस परिसर को विशेष पहचान दे रहे हैं।

वन विभाग की दीर्घकालीन योजना के तहत श्रीराम संस्कृति वन का विकास अभी जारी है। दीपावली मेले के दौरान इसे श्रद्धालुओं के लिए खोलने से चित्रकूट के धार्मिक पर्यटन में एक नया आकर्षण जुड़ा है। यहां आने वाले लोग आस्था, संस्कृति और प्रकृति के संगम का अनुभव कर रहे हैं।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी