home page

सतना : मझगवां अस्पताल में लापरवाही का मामला: नाबालिग ने काटीं मरीजों की पर्चियां, प्रशासन पर उठे सवाल

 | 
सतना : मझगवां अस्पताल में लापरवाही का मामला: नाबालिग ने काटीं मरीजों की पर्चियां, प्रशासन पर उठे सवाल


सतना, 16 जून (हि.स.)। मध्‍य प्रदेश के सतना जिले के मझगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। अस्पताल के ओपीडी पंजीयन काउंटर पर एक नाबालिग बच्चे द्वारा मरीजों की पर्चियां बनाए जाने का मामला सामने आने के बाद स्थानीय लोगों ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर आपत्ति जताई है।

जानकारी के अनुसार मंगलवार को अस्पताल में मरीजों की भारी भीड़ थी। इसी दौरान पंजीयन काउंटर पर नियमित कर्मचारी मौजूद नहीं था। आरोप है कि अस्पताल में पदस्थ मल्टी स्किल कर्मचारी देवदत्त तोमर ने अपने नाबालिग बेटे को काउंटर पर बैठाकर मरीजों का पंजीयन कराने का काम सौंप दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक बच्चा मरीजों के नाम, पते और अन्य विवरण दर्ज कर ओपीडी पर्चियां जारी कर रहा था।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मरीजों की व्यक्तिगत जानकारी और सरकारी रिकॉर्ड से जुड़े कार्य किसी अधिकृत कर्मचारी द्वारा ही किए जाने चाहिए। ऐसे में एक नाबालिग को इस जिम्मेदारी में शामिल करना प्रशासनिक लापरवाही का गंभीर उदाहरण है।

लोगों ने यह भी आरोप लगाया कि मल्टी स्किल कर्मचारी के पद पर नियुक्त देवदत्त तोमर लंबे समय से बीएमओ के वाहन चालक के रूप में कार्य कर रहे हैं, जिससे अस्पताल की नियमित व्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। उनका कहना है कि कर्मचारियों की कमी और व्यवस्थागत खामियों का खामियाजा मरीजों को भुगतना पड़ रहा है।

बीएमओ ने स्वीकार किया, बच्चे ने बनाई थीं पर्चियां

मामले पर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मझगवां के बीएमओ डॉ. रूपेश सोनी ने स्वीकार किया कि कुछ समय के लिए बच्चे ने पर्चियां बनाने में सहयोग किया था। उन्होंने बताया कि ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी निजी कारणों से बाहर गया हुआ था, जबकि नियमित कर्मचारी चित्रकूट मेले में ड्यूटी पर तैनात है। मरीजों की बढ़ती संख्या और गंभीर मरीजों की स्थिति को देखते हुए अस्थायी रूप से यह व्यवस्था की गई थी।

हालांकि बीएमओ का यह स्पष्टीकरण भी कई सवाल खड़े कर रहा है। यदि कर्मचारी अनुपस्थित था तो वैकल्पिक व्यवस्था क्यों नहीं की गई? क्या किसी नाबालिग को सरकारी रिकॉर्ड और मरीजों की जानकारी तक पहुंच देना नियमों के अनुरूप है? और यदि यह व्यवस्था अस्थायी थी, तो इसकी जिम्मेदारी कौन तय करेगा?

जांच और कार्रवाई की मांग

घटना सामने आने के बाद क्षेत्रवासियों ने जिला स्वास्थ्य विभाग से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और जिम्मेदार अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि पहले से ही संसाधनों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे अस्पताल में इस तरह की घटनाएं स्वास्थ्य सेवाओं की विश्वसनीयता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा रही हैं। अब नजर जिला स्वास्थ्य प्रशासन की कार्रवाई पर है कि वह इस मामले में क्या कदम उठाता है और क्या जिम्मेदारों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई की जाती है।

हिन्दुस्थान समाचार / हीरेन्‍द्र द्विवेदी